विश्व फार्मेसी दिवस पर नगर से सटे अगरसंडा स्थित सनबीम स्कूल में शुक्रवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया। फार्मासिस्टों ने कहा कि चिकित्सक भले ही दवा लिख देते हैं लेकिन मात्रा और इफेक्ट के बारे में फार्मासिस्ट को अधिक जानकारी होती है।
फिर भी लोग दवा लेने के बाद फार्मासिस्ट से कोई जानकारी नहीं लेना चाहते हैं। जबकि फार्मासिस्ट का यह अधिकार है कि अगर दवा की मात्रा तथा कंबिनेशन गलत हो तो उस पर्चा को वापस लौटा सकता है।
मुख्य अतिथि सांसद भरत सिंह ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस मौके पर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए फार्मासिस्टों ने अपनी समस्याओं तथा अस्पताल में कमी का सामने रखते हुए केंद्र और प्रदेश सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाया।
अपनी पीड़ा सांसद को बताई। सांसद भरत सिंह ने कहा कि भले ही मै चिकित्सा के क्षेत्र में कोई डिग्री नहीं ली है लेकिन बीएचयू जैसे संस्थान में पढ़ाई और छात्र राजनीति के दौरान बहुत से लोगों का उपचार कराया है। इसलिए चिकित्सक और फार्मासिस्ट के बारे में जानता हूं।
फार्मासिस्ट की जिम्मेदारी काफी अधिक होने के बाद भी उन्हें चिकित्सकों की तरह वह सम्मान नहीं मिलता है, जिसके वे हकदार हैं। चिकित्सा एवं दवा के क्षेत्र में जितना कार्य एवं जोखिम वाला कार्य फार्मासिस्ट करता है। उतना चिकित्सक भी नहीं कर पाता है।
कार्यक्रम में जिले के फार्मासिस्टों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभा को संबोधित करने वालों में डा. एसएन राय, डा. विपिन बिहारी, डा. रामकठिन राम, डा. अरविंद गुप्ता, डा. टीएन दूबे, डा. रमेश कुमार, डा. शैलेंद्र तिवारी, डा. बब्बन यादव, डा. शशिभूषण, डा. रितेश कुमार आदि मौजूद रहे।