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Ballia News: 35 हजार की आबादी वाले अस्पताल पर फार्मासिस्ट ने किया इलाज

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बलिया। मौसम में बदलाव से बच्चों से लेकर बुजुर्गों की सेहत पर असर पड़ रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है। रविवार को जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के 81 स्वास्थ्य केंद्रों पर मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेले का आयोजन हुआ। इसका मकसद ग्रामीणों को बेहतर इलाज व दवा मुहैया कराना था, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से आरोग्य मेले से लोगों को मोहभंग हो रहा है। अधिकतर केंद्रों पर एलोपैथ के चिकित्सक न आने से फार्मासिस्ट व वार्डबाॅय ने मरीजों का इलाज किया। हालांकि विभाग ने कागजों में 3100 से अधिक मरीजों के इलाज का दावा किया है, जबकि हकीकत कुछ और है। कई केंद्रों पर कर्मचारियों ने फर्जी आंकड़े भी भरे। स्वास्थ्य केंद्रों पर जन आरोग्य मेले की पड़ताल के दौरान यह सच्चाई सामने आई।
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पूर : जिला मुख्यालय से करीब बीस किमी दूर पूर गांव की आबादी करीब 35 हजार है। उसके बावजूद पीएचसी पर एक भी चिकित्सक तैनात नहीं है, पीएचसी पर लगे आरोग्य मेले में चिकित्सक की जगह फार्मासिस्ट पंकज कुमार ने मरीजों का इलाज किया। यहां सिर्फ 12 मरीज पहुंचे थे, अधिकतर मरीजों ने मेडिकल स्टोर या क्लीनिक से इलाज करवाया। क्षेत्र के गढ़मलपुर स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डॉक्टर अंकित सिंह की ड्यूटी पंदह अस्पताल पर लगाए जाने से वहां होम्योपैथिक डॉक्टर हरिश्चंद्र ने मरीजों को इलाज किया। चिकित्सक न होने से पीएचसी इसार पीथापट्टी 1.30 बजे बंद हो गया। गांव निवासी मंटू सिंह ने कहा कि दवा लेने गया तो अस्पताल बंद हो गया था।
जयप्रकाश नगर : मुरली छपरा पीएचसी पर चिकित्सकों के अभाव में आरोग्य मेला शोपीस बन कर रह गया है। क्षेत्र के न्यू पीएचसी लालगंज बहुआरा में प्रत्येक आरोग्य मेले में वार्ड बॉय मरीजों का इलाज करता है। न्यू पीएचसी कर्ण छपरा व न्यू पीएचसी टोला शिवन राय में फार्मासिस्ट व वार्ड बाॅय के सहारे इलाज होता है। पीएचसी मुरली छपरा पर डॉ. देवनीति ने सर्दी, खांसी, सांस सहित अन्य के 46 रोगियों की जांच कर दवा दी।
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जेपी नगर सीएचसी पर 27, लालगंज में 07, कर्ण छपरा में 10, टोला शिवन राय में 16 मरीजों का उपचार किया गया। नरही सीएचसी के कोटवा नारायणपुर, सोहांव, मेडवराकला सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक नहीं पहुंचे।

जनपद में चिकित्सकों की संख्या कम है। जन आरोग्य मेले में मरीजों की संख्या को देखते हुए चिकित्सक की ड्यूटी लगती है। अन्य पर आयुष व फार्मासिस्ट के सहयोग से मरीजों का इलाज व दवा वितरण किया जाता है। मेले में गंभीर मरीज आने पर उन्हें नजदीकी सीएचसी पर रेफर कर बेहतर इलाज की सुविधा दिलाई जाती है। डॉक्टर विजयपति द्विवेदी, सीएमओ।
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