अस्पताल में पसरा मातम
दिलीप राम की मौत की सूचना मिलते ही अस्पताल परिसर में भारी भीड़ जुट गई । पत्नी शिमला देवी, पुत्र आदित्य, प्रिंस और बेटी खुशी का रो-रोकर बुरा हाल है । बड़ा बेटा आदित्य अपने पिता के शव से लिपटकर जोर-जोर से चिल्ला रहा था– “पापा, मुझे भी अपने साथ ले चलो।” यह दृश्य देखकर हर कोई भावुक हो उठा।
परिवार के 65 वर्षीय वृद्ध पिता धनजी राम की स्थिति अत्यंत खराब थी। वह बार-बार यही कहते रहे– “हे भगवान! तूने यह क्या कर दिया... मुझे पहले क्यों नहीं बुला लिया।” अस्पताल परिसर में उपस्थित लोगों की आंखें यह दृश्य देखकर भर आईं। सूचना पाकर चौकी इंचार्ज ज्ञान प्रकाश तिवारी मौके पर पहुंचे और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बलिया भेज दिया।
पारिवारिक जिम्मेदारियों का अकेला बोझ उठाते थे दिलीप
दिलीप राम अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। वह मिस्त्री का कार्य कर किसी तरह पत्नी, दो बेटों—आदित्य व प्रिंस और एक बेटी खुशी का जीवन यापन कर रहे थे। उनकी असामयिक मृत्यु से परिवार पर संकट का पहाड़ टूट पड़ा है।