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बवाल के लिए जेल अधीक्षक जिम्मेदार

Mon, 04 May 2015 10:46 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, बलिया
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जिला कारागार में बंदी रक्षक रवींद्र की पिटाई के मामले में सोमवार को जिले में पहुंचे पुलिस उप महानिरीक्षक कारागार राजेंद्र प्रताप सिंह ने घटना के लिए प्रथम दृष्टया जेल अधीक्षक को कसूरवार ठहराया है।
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कहा कि जेल के अंदर बवाल और मारपीट की घटना घोर प्रशासनिक चूक का नतीजा है। जेल में लंबे समय से हो रहे उत्पात की मूल वजह क्या है, इस दिशा में भी वह जांच कर रहे हैं। डीआईजी ने एक-एक कैदियों से बारी-बारी से पूछताछ की और बयान दर्ज किया।

 जिला अस्पताल पहुंचकर बंदी रक्षक रवींद्र से भी घटना के बारे में जानकारी ली और बयान दर्ज किया। बंदी रक्षक और जेलर के भी बयान लिए गए। कहा कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद घटना की पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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डीआईजी दोपहर 12 बजे के करीब जेल पहुंचे। उनके आने की सूचना पहले से ही थी। इसके मद्देनजर जेल की सफाई पहले से दुरुस्त करा ली गई थी। 

डीआईजी जेल में पहुंचते ही सबसे पहले जेलर और बंदियों से मिले और उनसे गहन वार्ता की। इसके बाद वह एक-एक कर बंदियों से पूछताछ की।

जांच के बाद बताया कि घटना के लिए जेल प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। इस दौरान करीब डेढ़ सौ बंदियों, बंदी रक्षकों और जेल अधिकारियों से बयान लेने के बाद वह इस नतीजे पर पहुंचे कि पहले से छोटी-छोटी गलतियां होती रही हैं, जिसे नजर अंदाज किया जाता रहा है। इसी वजह से यह बड़ी घटना हुई है।


कहा कि समय रहते इस पर नकेल नहीं कसा गया तो इससे भी बड़ी घटना हो सकती है। जेल डीआईजी ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान स्वीकार किया कि पगली घंटी न बजाना भी प्रशासनिक लापरवाही है। कहा कि कमियां दोनों तरफ से हुई हैं। घटना हुई है, तो इसे झुठलाया नहीं जा सकता। एक सवाल के जवाब में कहा कि बंदी रक्षकों की शिकायत पर सुनवाई न होना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। कहा कि जेल के अंदर बंदियों के पास तक मोबाइल पहुंचने की शिकायत मिली है, यह भी जांच का विषय है। मोबाइल कैसे और किसके द्वारा पहुंचाया जाता है, इसकी जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। कहा कि पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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