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गंगा के तटवर्ती इलाकों में 41 गांवों में कराई जाएगी जैविक खेती

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बलिया। जिले में गंगा किनारे पांच से सात किमी के दायरे में जैविक खेती के लिए किसानों को जोड़ने की कवायद शुरू की गई है। इसके लिए किसानों को अनुदान भी मिलेगा। पांच ब्लॉकों के 41 गांवों के क्षेत्रों में यह खेती कराई जाएगी। इस व्यवस्था से जिले के लाखों किसानों को फायदा होगा।
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जिले में करीब 90 किलोमीटर की लंबाई में गंगा बहती है। गंगा के तटवर्ती इलाकों के किसान वर्ष में केवल रबी की फसल का उत्पादन कर पाते हैं। रबी की खेती के दौरान अक्सर बाढ़ आने के कारण अधिकांश किसानों को खरीफ की खेती का लाभ नहीं मिल पाता है। इसे देखते हुए सरकार ने गंगा किनारे पांच से सात किमी के दायरे में जैविक खेती के लिए किसानों को जोड़ने का प्रावधान किया है। इसके लिए, किसानों को अनुदान भी मिलेगा। इस व्यवस्था से जिले के लाखों किसानों को फायदा होगा। जिला कृषि उप निदेशक की माने तो जैविक खेती के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर प्रथम वर्ष 12 हजार, द्वितीय वर्ष 10 हजार और तृतीय वर्ष नौ हजार का अनुदान देने का प्रावधान किया गया है।
नमामि गंगे योजना से गठित हैं 60 कृषक समूह
जिले में नमामि गंगे योजना के तहत गंगा किनारे के सोहांव, दुबहड़, बेलहरी, बैरिया और मुरलीछपरा सहित 41 राजस्व गांवों में 20-20 हेक्टेयर में जैविक खेती के लिए कुल 60 कृषक समूहों का गठन किया गया है। यह कृषक समूह गंगा किनारे पांच से सात किमी के अंदर गांवों में बिना रासायनिक खाद प्रयोग किए जैविक खेती करेंगे।
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गंगा को स्वच्छ रखना मकसद
गंगा किनारे जैविक खेती कराने का एक मकसद गंगा को स्वच्छ रखना है। अधिकारियों की मानें तो गंगा किनारे के क्षेत्रों में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग होने पर इसका अंश गंगा तक नहीं पहुंचे, इसे लेकर पांच से सात किमी के दायरे में जैविक खेती को बढ़ावा देने की व्यवस्था की गई है।
कुल भूभाग - 299265 हेक्टेयर
खेती का कुल क्षेत्रफल - 219599 हेक्टेयर
खरीफ की खेती - 161651 हेक्टेयर
रबी की खेती - 180518 हेक्टेयर
कुल किसानों की संख्या - 475385
गंगा किनारे के क्षेत्रों में जैविक खेती कराने का प्रावधान किया गया है। यह योजना नमामि गंगे योजना के तहत संचालित होगी। इसमें किसानों को अनुदान भी मिलेगा। - इंद्राज, उप कृषि निदेशक, बलिया
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