बलिया। गांवों में श्रमिकों को रोजगार मुहैया करने वाली महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना लक्ष्य से काफी पीछे है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 19 ब्लाॅक की 940 ग्राम पंचायतों में पंजीकृत 318332 श्रमिकों में से मात्र 4019 को ही रोजगार मिला है।
गांवों के विकास के साथ ही जॉब कार्डधारकों को 100 दिन का रोजगार देने में सीयर, नवानगर और नगरा को छोड़कर बाकी ब्लॉक फिसड्डी साबित हुए हैं। सबसे अधिक श्रमिकों को इन्हीं ब्लाकों में रोजगार मिला है। वहीं, सबसे कम हनुमानगंज ब्लाक में मात्र 4 कार्डधारकों को 100 दिन का रोजगार प्राप्त हुआ है। वहीं श्रमिकों की संख्या कम मामले में ब्लाक बैरिया में 24, बेरुआरबारी 35 व रेवती में 40 कार्ड धारकों को 100 दिन का कार्य मिला है।
सौ दिन का रोजगार देने के मामले में हनुमानगंज, बैरिया, बेरुआरबारी, रेवती और मुरलीछपरा ब्लॉक के क्रमशः 4, 24, 35, 40, 83 परिवारों को ही काम उपलब्ध कराया जा सका है। जबकि दुबहड़ के 115, बांसडीह के 124, मनियर के 165, बेलहरी के 247, पंदह के 249, गड़वार के 279, चिलकहर के 303, सोहांव के 318 और रसड़ा के 393 परिवारों को 100 दिन का रोजगार मिल पाया है। तीन ब्लॉक की स्थिति अपेक्षाकृत ठीक है। जिसमें 558 परिवारों को 100 दिन का रोजगार देकर सीयर ब्लॉक पहले पायदान पर है, 554 परिवारों को रोजगार देने वाला नगरा द्वितीय और 553 परिवारों को रोजगार देकर नवानगर तीसरे स्थान पर है।
डीसी मनरेगा रिचा सिंह ने कहा कि मनरेगा में श्रमिकों को 100 दिनों का काम देने का निर्देश ब्लाॅक स्तर पर दिया गया है। इनकी कैटेगरी के अनुसार कार्य का निर्धारण होता है। 60 या 80 दिन तक कार्य करने वालों को प्राथमिकता के आधार कार्य दिया जाता है।