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Ballia News: आत्महत्या के मामले में एक आरोपी गिरफ्तार

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बलिया। विजईपुर निवासी शैविंद्र सिंह की आत्महत्या मामले में आरोपी अर्पित सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर चालान कर दिया। अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है। घटना के बाद मोहल्ले में मातम छाया है। हर कोई इस घटना से आहत है। लोगों का कहना है कि चंद पैसों के लालच में शैविन्द्र फर्जी नौकरी देने वाले रैकेट में बुरी तरह फंस गया था। जान गंवाने के बाद ही छुटकारा मिला।
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इनके चंगुल में इस कदर फंसा था कि परिवहन मंत्री का रिश्तेदार होकर भी वह पुलिस या मंत्री तक शिकायत नहीं की। हर किसी के जुबान पर यही सवाल है आखिर क्या कारण रहा कि वह किसी से शिकायत नहीं किया। सूदखोर के प्रताड़न की भी शिकायत नहीं किया था। संदीप कुमार व वरुण चतुर्वेदी के झांसे में आकर अपना 12 लाख गंवाने के बाद कई युवाओं व दोस्तों से नौकरी दिलवाने के नाम पर लाखों रुपया वसूल कर दोनों आरोपियों को दिए थे।
नौकरी न लगने पर पैसा देने वाले लोग शैविन्द्र पर पैसा वापस करने का दबाव बना रहे थे। शैविन्द्र सभी युवाओं का पैसा वापस करने के लिए संदीप कुमार व वरुण चतुर्वेदी से पैसा वापस मांगता रहा, वह टालमटोल करते रहे। यहां तक की अपना मोबाइल नंबर व पता तक बदल दिए। इससे परेशान रहने लगा।
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आरोपियों के घर बुलडोजर चलाने की गुहार
बेटे की असमय मौत से आहत पिता सुशील सिंह ने जिला प्रशासन से आरोपियों के घर पर बुलडोजर चलाने की गुहार लगाई है। आंखों की आंसू पोछते हुए कहा कि बेटे की मौत के आरोपियों के खिलाफ प्रशासन सख्त कार्रवाई करे। उनके घरों को बुलडोजर से गिरा दे या हमारे घर को ही गिरा दे। मेरा सब कुछ खत्म हो गया। अब उसकी पत्नी व दो बच्चे की परवरिश कैसे होगी। आगे से किसी के जवान बेटे की असमय मौत न हो।

वीडियो व सुसाइड नोट ने बदली कहानी
मृतक शैविन्द्र के पास मिले सुसाइड नोट व वीडियो से पूरी कहानी बदल दी। मौत के बाद परिजनों व पुलिस को लगा कि शराब के ज्यादा नशे के कारण मौत हुई है। घटना के बाद पहुंची पुलिस ने कमरे व मोबाइल की तलाशी ली तो सुसाइड नोट व मोबाइल में वीडियो मिला, जिसे पढ़ने व देखने के बाद पूरी कहानी ही सामने आ गई।

खाते में मंगाते थे पैसा
पत्नी पूजा सिंह ने कहा कि वह कभी परेशानी नहीं बताते थे। नौकरी के नाम पर पैसा देने के नाम पर मेरा सभी गहना बेच दिए। मेरे पति ठगों के चंगुल में बुरी तरह फंस गए थे। वह लोग आए दिन इनसे पैसा खाते में मंगाते थे। अपनी मां व भाई से दस से 15 हजार रुपये मांग कर देती थी तो यह आरोपियों के खाते में भेजते थे। पूछने पर भी कुछ नहीं बताते थे।

नौकरी दिलवाने वाला दर्जनों रैकेट संचालित
जिले में फर्जी नौकरी दिलवाने के नाम पर दर्जनों रैकेट काम कर रहा है। जिसके एजेंट गांव-गांव तक फैले हुए है। वह चंद पैसों के लालच में अपने नाते रिश्तेदारों को सब्जबाग दिखाकर उनकी जमा पूंजी का लाखों रुपया ले लेते हैं। इस तरह की शिकायतें हर थाना में आ रही है। एएसपी दुर्गा प्रसाद तिवारी ने बताया कि लोगों को खुद जागरूक होकर इससे बचना पड़ेगा। इस समय बिना फार्म व इंटरव्यू के नौकरी नहीं मिलती।
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