जनपद ही नहीं आसपास के कई जिलों में राजकीय इंटर कॉलेज का नाम अच्छी शिक्षण के लिए लिया जाता रहा है। यहां दाखिले के लिए मारामारी होती थी लेकिन अब उसकी चमक धूमिल होती जा रही हैै। शिक्षकों की कमी के चलते बच्चों की संख्या साल दर साल घटती जा रही है। यही नहीं संसाधनों के अभाव में प्रायोगिक कक्षाएं भी अब ना के बराबर रह गई हैं।
जिला मुख्यालय पर सन 1900 में स्थापित राजकीय इंटर कॉलेज दुश्वारियों का दंश झेल रहा है। शिक्षकों के सृजित पद के सापेक्ष अध्यापकों की संख्या काफी कम रह गई है। हाईस्कूल में शिक्षकों का सृजित पद 23 है लेकिन मौजूदा समय मेें 16 शिक्षक ही कार्यरत हैं। उनमें से भी छह शिक्षकों को उच्चीकृत विद्यालयों से संबद्ध कर दिया गया है। यानी अब विद्यालय के हाईस्कूल कक्षा में कुल 10 शिक्षक ही कार्यरत हैं। वहीं इंटरमीडिएट में शिक्षकों का सृजित पद 8 है, जिनमें से केवल 2 ही हैं।
विद्यालय में प्रवक्ताओं की कमी का आलम यह है कि कुछ विषयों के प्रवक्ता तो दो दशकों से भी तैनात नहीं किए गए हैं। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो इसके लिए 3000-3500 रुपये के मानदेय पर शिक्षक रखे गये हैं। शिक्षकों की कमी के कारण ही विद्यालय में बच्चों की संख्या काफी कम रही। पिछले शिक्षण सत्र में छह से बारह तक की कक्षा में कुल नौ सौ बच्चों का प्रवेश हुआ था लेकिन कुछ साल पहले तक इस विद्यालय में प्रवेश पाने वाले बच्चों की संख्या दो हजार से अधिक ही रहती थी।
विद्यालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित बोर्ड परीक्षा वर्ष 2015-16 में हाईस्कूल में 146 और इंटरमीडिएट में मात्र 124 बच्चे शामिल हुए। जबकि जब सब कुछ ठीक ठाक था, तो इनकी संख्या एक हजार तक रहती थी।