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डूबते सूर्य को अर्घ्य, की मंगल कामना

Sun, 06 Nov 2016 11:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,बलिया
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रामलीला मैदान पर बच्चे से अर्घ्य दिलाता युवक।
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सूर्योपसना का प्रमुख पर्व डाला छठ की पूरे जनपद में रविवार को धूम रही। लाखों व्रती महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की। दोपहर बाद से गंगा, घाघरा, टोंस और मगई नदी सहित प्रमुख सरोवरों एवं तालाबों के अलावा नवनिर्मित छठ घाटों पर व्रती महिलाओं का जत्था पहुंचने लगा।
   इस दौरान महिलाएं पारंपरिक गीत कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाय..., होख न सहाय दीनानाथ, कांवर लचकत जाय। बाट के पूछता बटोहिया, इ बहंगी केकरा जाय.... गाते हुए घाटों पर पहुंची, जहां सूर्य को पहला अर्घ्य देने के बाद देरशाम घर लौटी। इस दौरान कई व्रती महिलाएं घंटों एक पैर पर नदी में खड़ी रही। सोमवार की सुबह उदीयमान सूर्य को दूसरा अर्घ्य देकर व्रत तोड़ेंगी।
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   सूर्योपसना का पर्व डाला छठ नगर समेत ग्रामीणांचलों के नदी तटों पर सरोवरों के किनारे विहंगम दृश्य देखने को मिला। इस दौरान जगह-जगह मेले जैसा माहौल था। पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा गया। नगर के टाउन हाल बापू भवन, महावीर घाट, रामलीला मैदान, बिचला घाट, विजयीपुर घाट, लालघाट, राजपूत नेउरी, बेदुआ, गौशाला रोड, मिश्र नेउरी, आनंदनगर, संकट मोचन कालोनी, हरपुर नगर, जटहा बाबा मंदिर, हाईड्रील कालोनी, भृगु आश्रम, बहादुरपुर, गोठहुली, काशीपुर, मिड्ढा, अगरसंडा, निधरिया, पौहाड़ीपुर सहित अन्य घाटों और सरोवरों पर व्रती महिलाएं                अपराह्न तीन बजे से पहुंचना शुरू कर दिया था। इस दौरान व्रती महिलाओं ने विधि-विधान से पूजन-अर्चन करने के बाद अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य देकर परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की। पारंपरिक और लोकप्रिय गीत गाती हुई महिलाओं की टोली नदी, सरोवर और पोखरा आदि पर पहुंची,            जहां बनी बेदी पर विधिवत पूजन-अर्चन किया।
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