फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ballia News: जिले में 99 सरकारी अस्पताल, सिर्फ सात में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम

विज्ञापन
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर में नहीं लगा अ​ग्निशमन यंत्र।संवाद
विज्ञापन
बलिया। जिले के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। 99 सरकारी अस्पतालों में से केवल सात के पास ही अग्निशमन विभाग की एनओसी है। जिन अस्पतालों के पास एनओसी है, उनमें महिला अस्पताल में लगा फायर फाइटिंग सिस्टम ट्राॅयल में एक बार फेल हो चुका है। पिछले महीने दूसरे ट्राॅयल में पास हुआ है। इसके अलावा शहर के छोटे-बड़े 100 पंजीकृत नर्सिंगहोम में सिर्फ छह ने ही अग्निशमन विभाग से एनओसी ली है।
विज्ञापन

राजस्थान के जयपुर अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर में आग लगने और आठ मरीजों की मौत हो गई थी। इस घटना यहां के अस्पतालों ने सबक नहीं लिया है, न ही जिम्मेदार सख्ती बरत रहे हैं। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के अलावा जिले में 20 सीएचसी, 11 पीएचसी व 66 न्यू पीएचसी को मिलाकर 99 सरकारी अस्पतालों में से जिला अस्पताल के अलावा छह स्वास्थ्य केंद्रों को ही अग्निशमन विभाग ने आग से सुरक्षा के मानकों पर खरा पाते हुए एनओसी जारी किया है।
इमरजेंसी व ट्राॅमा सेंटर में फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं
जिला अस्पताल की इमरजेंसी व ट्राॅमा सेंटर में निर्माण के बाद फायर फाइटिंग सिस्टम लगा ही नहीं। अस्पताल के दूसरे परिसर स्थित नए भवन में लगा है, लेकिन रखरखाव न होने के कारण खराब हो गया है। आग से बचाव के इंतजाम के नाम पर कहीं कहीं सिलिंडर दीवारों पर टंगे हैं।
विज्ञापन

छह नर्सिंगहोम, 94 बिना फायर एनओसी के
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 100 नर्सिंगहोम संचालित हैं। इसमें से सात नर्सिंगहोम को ही अग्निशमन विभाग की ओर से फायर एनओसी जारी हुई है। जबकि 26 के संचालकों ने आवेदन तो किया लेकिन जांच में आवश्यकता के अनुसार पानी टैंक, निकास द्वार, वेंटिलेशन आदि न होने से एनओसी नहीं मिली। उन्हें मानक पूरे करने के लिए कहा गया है। हालांकि जिले में करीब 400 नर्सिंगहोम व क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग में बिना पंजीकरण और बिना फायर एनओसी के ही चल रहे हैं।

सिकंदरपुर में पानी टंकी तक नहीं, खेजुरी सीएचसी में सुरक्षा के दावे फेल

जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर स्थित सीएचसी पर खेजुरी 30 बेड के अस्पताल में 90 से 100 मरीज ओपीडी में आते हैं। आग लगने की स्थिति में उसे बुझाने की कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल परिसर में एक भी फायर सिलिंडर नहीं है। न तो फायर स्प्रिंकलर हैं, न फायर होज रील और न ही किसी कोने में पानी सप्लाई के लिए हाईड्रेंट टैंक बना है। केवल एक ओवरहेड टैंक मौजूद है पर उसका उपयोग भी सामान्य जल आपूर्ति तक ही सीमित है। सिकंदरपुर सीएचसी पर भी आग से बचाव के इंतजाम नहीं है। ओवरहेड टैंक तक नहीं लगा है। वहीं, नगरा पीएचसी, वैना पीएचसी, सीयर सीएचसी, लालगंज न्यू पीएचसी पर आग से बचाव के नाम पर सिर्फ सिलिंडर दीवारों पर लगाए गए हैं।

अग्नि सुरक्षा के मानक
- धुआं निकासी के लिए दरवाजा होनी चाहिए। हर मंजिल पर कम से कम एक स्मोक अलार्म होना चाहिए

- इमारत के किसी भी कमरे में ईंधन जलाने वाले उपकरण होने पर कार्बन मोनोऑक्साइड डिटेक्टर भी लगाया जाना चाहिए
- एक मीटर चौड़ा रास्ता होना चाहिए
- आग लगने पर भागने वाले रास्ते का दरवाजा बिना चाबी से खोला जाने वाला होना चाहिए
- धूम्रपान करने पर प्रतिबंध होना चाहिए
सीएमओ कार्यालय से जो भी सूची आई थी, उनकी जांच कर एनओसी जारी किया है। अन्य जो भी पेंडिंग में है, उनमें कुछ कमी पाई गई थी। मानक जब तक पूरे नहीं होंगे, तब तक एनओसी नहीं दिया जाएगा। भारतेंदू जोशी, मुख्य अग्निशमन अधिकारी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें