जिउत पुत्रिका व्रत कथा सुनती व्रती महिलाएं।संवाद
बलिया। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर शनिवार को माताओं ने संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना से जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) का निर्जला व्रत रखा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान जीमूतवाहन की पूजा करने से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं। शाम को मंदिरों, तालाब और नदी किनारे पूजा-अर्चना के लिए महिलाओं की भीड़ रही। व्रत को लेकर कई दिन पहले से महिलाएं जिउतिया गुथवाने और पूजन सामग्री की खरीदारी में जुटी थीं। बाजारों में भी जिउतिया खरीदने के लिए भीड़ रही।
मान्यता के अनुसार महिलाएं संतान की लंबी आयु और उसकी रक्षा की कामना से पूरे दिन और रात निर्जला व्रत रखती हैं। रविवार को निर्धारित पूजा-अर्चना और धार्मिक विधियां पूरी करने के बाद व्रती महिलाएं पारण करेंगी। इसके साथ ही निर्जला व्रत समाप्त होगा। पारण के बाद पहले जल ग्रहण कर परिवार की परंपरा के अनुसार सात्विक भोजन किया जाएगा।
आचार्य पं. अखिलेश उपाध्याय ने बताया कि जीवित्पुत्रिका व्रत भगवान जीमूतवाहन के साथ संतान की लंबी आयु और स्वास्थ्य की कामना के लिए किया जाता है। तीन अक्तूबर, शनिवार को व्रत रखा गया। चार अक्तूबर, रविवार को उदया अष्टमी सुबह 7:28 बजे तक रहेगी। इसके बाद व्रती महिलाएं पारण करेंगी।