जनपद में बिना एनओसी के ही कई नर्सिंग होम और अस्पताल संचालित हो रहे हैं। यह मानक को दरकिनार कर मरीजों का इलाज कर रहे है। अधिकारियों की उदासीनता के चलते यह सब हो रहा। उधर, अग्निशमन विभाग की माने तो बिना एनओसी के कोई भी नर्सिंग होम अथवा अस्पताल संचालित नहीं हो सकते हैं, लेकिन जनपद में इसकी खुलेआम अवहेलना हो रही है। वर्ष 2017 में 12 नर्सिंग होमों ने स्वीकृति ली थी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में वर्ष 2017-18 में कुल 43 नर्सिंग होम ही पंजीकृत है। इसमें से मात्र 12 ने ही अग्रिशमन विभाग से एनओसी ली है। जबकि शेष बिना एनओसी के संचालित हो रहे है। अग्रिशमन विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष नोटिस दिया जाता है और जिलाधिकारी को अवगत करा दिया जाता है। बावजूद नर्सिंग होम संचालक इसके प्रति उदासीनत बने हैं। इन नर्सिंग होम व अस्पतालों में न आग से बचने के इंतजाम है और न ही आपातकालीन स्थिति में निकलने के लिए कोई इमरजेंसी गेट की व्यवस्था है। इसके अलावा फायर गाड़ी जाने के लिए भी कोई मार्ग नहीं है। अधिकांश गली में ही संचालित है। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों की माने तो जिला महिला चिकित्सालय के अलावा जिला अस्पताल समेत जनपद के किसी भी सीएचसी और पीएचसी पर भी अग्रिशमन विभाग की ओर से एनओसी प्राप्त नहीं की गई है।