प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया है। भाजपा की सरकार बनने के बाद किसानों को कर्ज माफी की आस जग गई है। इसके चलते अधिकांश किसान बकाये को नहीं चुका रहे हैं। भाजपा के निर्णय से सहकारी बैंकों को भी भरपाई की उम्मीद है। बताया जाता है कि आखिरी वित्तीय माह होने के बाद भी बैंकों की ओर से किसानों के खिलाफ वसूली को लेकर कोई खास अभियान नहीं चलाया जा रहा है।
विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से सरकार बनने पर किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया गया। अब प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने जा रही है लिहाजा किसानों को भी कर्जमाफी की उम्मीदें बढ़ गई हैं। जिले में कुल दो लाख 85 हजार 381 किसान हैं। कृषि विभाग के आंकड़े को मानें तो करीब ढाई लाख किसानों ने कर्ज लेकर ही खेती का काम किया है। इसमें केसीसी व फसली ऋण योजना के जरिए बैंकों से कर्ज लिया गया है। बैंकिंग अधिकारियों की मानें तो जिले में करीब 60 हजार किसानों के ही खाते एक्टिव हैं और शेष खाते में अधिकांश एनपीए हो चुके हैं। एलडीएम ने बताया कि किसानों से वसूली के लिए उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक है लिहाजा आरसी तो जारी की जाती है लेकिन वसूली नहीं हो पाती है। अधिकांश किसानों के कर्ज 50 हजार या इससे अधिक का है। किसानों के अलावा सहकारी बैंकों को भी कर्जमाफी योजना के तहत होने वाली भरपाई से बैंकों की दशा सुधरने की उम्मीद है।