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Ballia News: 34 लाख की आबादी पर एक भी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं

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बलिया। जिला अस्पताल पर 34 लाख मरीजों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है। उसके बावजूद तीन दशक से यहां हृदय रोग विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में हृदय रोगियों के उपचार की जिम्मेदारी फिजिशियन के कंधे पर ही है। ईसीजी और खून जांच की व्यवस्था तो है, लेकिन गंभीर मरीजों के ईको टेस्ट व सर्जरी की कोई सुविधा न होने से चिकित्सक मरीजों को वाराणसी रेफर कर देते हैं। यहां तक कि वेंटिलेटर तक कि सुविधा नहीं है। जिले के सरकारी व प्राइवेट अस्पताल सिर्फ शोपीस हैं।
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जिले में सर्दी के मौसम की आहट से हृदय रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। अस्पताल में रोज 1500 से दो हजार मरीज इलाज को आते हैं, फिजिशियन की ओपीडी में 20 से 30 मरीज हर रोज पहुंचते हैं। वहीं, इमरजेंसी में 10 से 12 मरीज हृदय रोग की समस्या लेकर आते हैं, इलाज के अभाव में चार पांच रेफर होते हैं। ग्रामीण इलाकों में स्थापित सीएचसी- पीएचसी की स्थिति तो यह है कि ह्रदय रोगियों का उपचार करना तो दूर सीधे जिला अस्पताल को रेफर कर अपना पिंड छुड़ाते है। सर्दी का माैसम आते ही उच्च रक्तचाप और हृदय रोग की समस्या भी बढ़ जाती है। कई बार स्थिति तो यह होती है कि तत्काल उपचार न मिलने से रास्ते में ही मरीज की मौत हो जाती है। जिला अस्पताल में भी कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने से हृदय की बीमारी से पीड़ित मरीजों के उपचार के नाम पर खानापूर्ति की जाती है। ईसीजी में हार्ट बीमारी की आशंका पर ईको सहित अन्य जांच के लिए तत्काल रेफर कर दिया जाता है। वर्तमान समय में अस्पताल में चार फिजिशियन तैनात है, लेकिन गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है।

लंबे समय से कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती की मांग को लेकर शासन को पत्र भेजा गया है। ऐसे में फिजिशियन हृ़दय की बीमारी से पीड़ित मरीजों का उपचार करते हैं। संसाधन व रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी से गंभीर मरीजों को वाराणसी रेफर किया जाता है।
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डॉ. विजयपति द्विवेदी, मुख्य चिकित्साधिकारी, बलिया।
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