बलिया। कलेक्ट्रेट परिसर में बुधवार को संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में प्रदर्शन कारियों ने नये कृषि कानून की प्रतियां जलाई। इसके उपरांत हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि महीनों से देश के कोने-कोने से पहुंचे किसान लाखों की तादाद में दिल्ली की सीमा पर कड़ी ठंड में महीनों से डटे हुए हैं और तीनों कानूनों के खात्मे की मांग कर रहे हैं, लेकिन कारपोरेट घरानों से पोषित और भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी सरकार दर्जनों संशोधनों का प्रस्ताव लाकर किसानों को ग़ुमराह कर रही है। कहा कि इस कानून में कृषि उत्पाद के रेट तय करने का अधिकार कंपनियों को देता है तथा सरकार को किसानों के प्रति संवैधानिक जिम्मेदारियों से मुक्त करता है। इतना ही नहीं, यह जमाखोरों को पैदा करने की नर्सरी है। यह राशन की दुकानों को खत्म करने का सरकारी षड्यंत्र है, क्योंकि जब सरकार अनाज नहीं खरीदेगी तो एफसीआई भी समाप्त हो जायेगी। इतना ही नहीं, यह कानून किसी भी बैंक से कंपनियों को कर्ज लेने की छूट देता है, जिससे देश में विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकशी जैसे भगोड़े पैदा होंगे। इस अवसर पर जनार्दन सिंह, लक्ष्मण पाण्डेय, रामकृष्ण यादव, तेजनारायण, परमात्मा नन्द राय, सत्यप्रकाश सिंह, संतोष सिंह, बलवन्त यादव, सूर्यप्रकाश सिंह,ओपी सिन्हा, रणजीत सिंह, राजकुमार मौर्य, अरविंद गोंडवाना, सुशांत राज,अनिल यादव, अवधेश सिंह आदि मौजूद रहें। माकपा जिला कमेटी के सदस्य परमात्मा नन्द राय ने 20 जनवरी को पुन:11 बजे से कलेक्ट्रेट परिसर में एक दिवसीय धरने का निर्णय लिया गया। किसान मोर्चा के नेताओं ने किसानों और मजदूरों तथा नौजवानों से अपील की है कि आगामी बीस जनवरी के धरने मे हजारों की संख्या में उपस्थित हों।