बड़े नोट बंद होने के चलते सूनी पड़ी दवा मंडी।
500 व 1000 रुपये की नोट बंद होने के बाद खुले के अभाव में पहले दवा के दूकानदारों ने अपनी दूकानों को बंद कर दिया। अब बड़े व्यापारियों ने भी अपनी-अपनी दूकानें बंद करने लगे हैं जिससे स्थिति और खराब हो गई है।
शनिवार को अधिकांश व्यापारियों ने खुले पैसे, पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट तथा इनकम व सेल टैक्स के भय के कारण अपनी प्रतिष्ठानों को बंद कर दिया। उनका कहना था कि दूकान पर जो भी व्यापारी आ रहा है वह 500 व 1000 रुपये की नोट दे रहा है। ऐसे में खुले पैसे नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते उधार देना पड़ा है। अगर ज्यादे उधार हो गया तो उसे वापस लेना भी एक समस्या उत्पन्न हो जाएगी। इसके अलावा बड़े शहरों के कई प्रतिष्ठानों पर इनकम टैक्स व सेल टैक्स छापेमारी किया है। जिसके चलते यह भय सता रहा है कि कहीं यहां भी इनकम व सेल टैक्स धावा न बोल दें। जब दो-चार दिन में सबकुछ नार्मल हो जाएगा। पुन: नियमित दूकान खुलने लगेंगी। लेकिन अभी बंद करना ही उचित है।
दूकानदारों का कहना है कि अगर नोट को बंद करना ही था तो बड़ी मात्रा में 100 तथा 50 के नोट को उपलब्ध कराना चाहिए था। मोदी के फैसले को सही ठहराने वाले व्यापारी मंजय कुमार ने बताया कि कारोबार को चलाने के लिए बड़े-छोटे नोट जरूरी हैं। बड़े नोट बंद करने से पहले छोटे नोटों का मुद्रण जरुरी है। लेकिन ऐसा नहीं है ऐसे में हम अधिक मात्रा में बड़े नोट नहीं ले सकते हैं। कारण किए एक बार ही सीसी एकाउंट होल्डर को बड़े नोट जमा कराने हैं। वहीं दवा कारोबारी आनंद सिंह ने कहा कि पीएम मोदी ने बड़े नोटों को बंद कर बहुत ही सराहनीय कार्य किया, लेकिन उनके स्थान पर पहले छोटे नोटों का मार्केट में लाने की जरुरत थी। एक हजार से भी बड़ा नोट दो हजार का जारी कर दिया गया। ऐसे में दूकानदारों को 100 तथा 200 का सामान लेने वालों को पैसा काटकर वापस करना कम मुसीबत नहीं है।