सरकार की तरफ से भले ही स्वास्थ्य सुविधाएं लोगाें को मुफ्त मुहैया कराई गई हो, लेकिन जिला अस्पताल में यह सतह पर नहीं दिखती। यहां पर जांच के लिए मरीजों को बाहर भेजा ही जाता है, जरूरी दवाओं की उपलब्धता न के बराबर है।
जबकि गत दिनों स्वास्थ्य राज्य मंत्री शंखलाल मांझी ने निरीक्षण के दौरान सख्ती से चेतावनी दी थी। इस पर जब सीएमएस से बात की गई तो उनका कहना था कि मंत्री ने लिखित नहीं मौखिक आदेश दिया था।
पिछले 13 फरवरी को सूबे के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मातृ शिशु कल्याण राज्य मंत्री शंखलाल मांझी ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था। दवाओं का टोटा देख सीएमएस केपी गर्ग की जमकर क्लास ली थी। हिदायत दी थी कि अविलंब दवाओं को मंगाया जाए।
इसके पहले 12 जनवरी को आजमगढ़ मंडल के अपर स्वास्थ्य निदेशक डा. उषा जायसवाल ने निरीक्षण के दौरान दवा की उपलब्धता को प्राथमिकता दी और जो दवा नहीं थी, तत्काल मंगाने का निर्देश दिया था। यहां तक कि दवाओं की आपूर्ति अविलंब लोकल मार्केट से खरीदकर करने की हिदायत दी थी।
आलम यह है कि अभी भी अस्पताल में जीवन रक्षक दवाओं का टोटा है। सीएमएस केपी गर्ग ने बताया कि मंत्री और एडी का निर्देश तो मिला है लेकिन लिखित नहीं केवल मौखिक। वहीं सीएमओ पीके सिंह ने बताया कि इसके लिए सीएमएस को निर्देश दिया हूं। जल्द दवाओं की पूर्ति कर ली जाएगी।