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ताला बंदी कर स्वास्थ्य कर्मियों ने दिया धरना,ठप्प रही चिकत्सिकीय व्यवस्था

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बलिया। वेतन सहित विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी पर रही। जिला अस्पताल सहित जनपद के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर ताला बंदी कर स्वास्थ्य कर्मी धरने पर बैठ गए। इसकी जानकारी होते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट बृजकिशोर दुबे ने प्रभारी सीएमओ केडी प्रसाद व एसीएमओ डॉ. हरिनंदन प्रसाद को मौके पर बुलाया और उनके लिखित आश्वासन पर दोपहर बाद धरना समाप्त हुआ। उपचार के लिए आए मरीज इधर-उधर भटकते रहे।
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डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले संयुक्त कर्मचारी चिकित्सा स्वास्थ्य मातृ शिशु एवं परिवार कल्याण महासंघ एवं नर्स, कर्मचारी पिछले कई वर्षों से बाकी एरियर, बोनस, छठवां व सातवें वेतनमान सहित कई मदों में लंबित देयकों के भुगतान की मांग के लेकर पिछले कई माह से स्वास्थ्यकर्मी आंदोलित थे। समय बीतने के बाद भी मांग पूरी न होने से क्षुब्ध कर्मचारियों ने ओपीडी सहित सभी चिकित्सकीय व्यवस्था ठप्प कर जिला अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए।जिससे प्रशासनिक अमला सकते में पड़ गया।
सिटी मजिस्ट्रेट के प्रयास से प्रभारी सीएमओ डॉ.केडी प्रसाद व कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों से वार्ता कर 15 मार्च तक मांग पूरी करने का लिखित आश्वासन दिया। इसके उपरांत धरना समाप्त हुआ। धरना देने वालों में अवधेश सिंह, अरुण सिंह, सत्या सिंह, योगेंद्र पाण्डेय, अरुण सिंह, अविनाश चौरसिया, शैलेश सिंह , अजय मिश्रा, उदय यादव, मलप पांडेय, विवेक सिंह, अशोक सिंह, बब्बन यादव, किरन सिंह, सुनीता राय, उमा श्रीवास्तव आदि रहे।
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हड़ताल से हलकान रहे मरीज, उपचार के लिए लगाते रहे गुहार
बलिय़ा। डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन, संयुक्त कर्मचारी स्वास्थ्य मात शिशु व परिवार कल्याण के तत्वावधान में आयोजित धरना कार्यक्रम के चलते जिला अस्पताल में मरीजों का उपचार नहीं हुआ। दवा वितरण काउंटर और जांच घर बंद रहे। दूर दराज से आये मरीजों को बिना उपचार कराए वापस जाना पड़ा।
स्वास्थ्य कर्मियों के हड़ताल के चलते मंगलवार को मरीज और उनके तीमारदार हलकान रहें। ओपीडी, जांच घर,पर्ची काउंटर व दवा वितरण कक्ष के ताले नहीं खुले। जबकि सैकड़ों मरीज ओपीडी के बाहर चिकित्सक के आने का इंतजार करते रहे। इस दौरान महिला मरीज कुछ ज्यादा ही परेशान रहीं। उनके साथ रहे बच्चों को भी हड़ताल के कारण परेशानी उठानी पड़ी। महिला मरीज घूम-घूमकर उपचार के लिए गुहार लगाती रहे, लेकिन उनका कोई भी सुनने वाला नहीं था। आखिरकार उन्हें बिना उपचार कराए घर लौटना पड़ा। हड़ताल के चलते दूर-दराज से आये मरीजों व उनके तीमारदारों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। हालांकि इस दौरान इमरजेंसी सेवाएं बहाल रहीं, लेकिन वो मरीजों के लिए नाकाफी साबित हुई।
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