करवा चौथ का व्रत कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष यह व्रत दस अक्तूबर शुक्रवार को मनाया जाएगा। करवा चौथ व्रत रखकर सुहागिनें पति की दीर्घायु के लिए कामना करेगी।
इस दिन निर्जला उपवास रखकर माता पार्वती सहित पूरे शिव परिवार की आराधना करती हैं। बृहस्पतिवार को करवा व्रत के लिए शहीद पार्क चौक, कासिम बाजार, विजय सिनेमा रोड आदि बाजारों में काफी भीड़ रही। शृंगार के सामान की खरीदारी की। हाथों में मेहंदी लगाने को लेकर दुकानों भी उन्हें अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। सुहागिन चांद व पति को चलनी में देखकर पति के हाथ से ल ग्रहण कर व्रत पूर्ण करेंगी। ज्योतिषाचार्य डाॅ. अखिलेश उपाध्याय ने बताया कि इस व्रत में चंद्रमा का विशेष महत्व होता है। चंद्रोदय के पश्चात ही रात के समय व्रत तोड़ा जाता है। व्रती पहले चंद्रमा को अर्घ्य प्रदान करती हैं। तत्पश्चात चलनी से चंद्रमा के साथ पति का चेहरा निहारती हैं। 10 अक्तूबर की रात 7.38 बजे चंद्रोदय होगा। उसके बाद सुहागिनें पूजा पाठ कर अपना व्रत तोड़ सकती हैं। करवा चौथ व्रत के लिए कुछ खास पूजा सामग्री होना बहुत जरूरी है, क्योंकि इनके बिना करवा चौथ की पूजा पूरी नहीं होती है। मिट्टी का घड़ा, दीया, चंदन-अक्षत और कुमकुम , चलनी-थाली और पानी का लोटा , करवा चौथ व्रत कथा की किताब। पहला व्रत रहने वालीं नव सुहागिनों के लिए खास : करवा चौथ को लेकर नव विवाहित जोड़ों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। करवा चौथ नव विवाहिताओं के लिए उनके जीवन की शुरुआत को सुखद और यादगार बनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर होता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं।