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मक्का में बलिया के मकबूल आलम की भी जान गई

Fri, 25 Sep 2015 12:01 AM IST
िशवानंद बागले / अमर उजाला बलिया
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हज की पाक यात्रा के दौरान मक्का में शैतान को पत्थर मारते समय हुई भगदड़ में चिलकहर विकास खंड के डुमरी गांव निवासी मकबूल आलम (65) की भी जान चली गई। यह जानकारी उनके साथ हज पर गए कस्बा के पुरानी मस्जिद निवासी शहनवाज ने अपने बड़े भाई सरफराज को फोन पर दी।
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सरफराज ने मकबूल आलम के घर वालों को इस दुखद घटना से अवगत कराया। खबर मिलते ही उनके परिवार में कोहराम मच गया। बता दें कि रसड़ा कस्बे के पुरानी मस्जिद निवासी शहनवाज अपनी अम्मी गौहरी खातून, ससुर मकबूल आलम और बड़ी साली कहकशां बानो के साथ हज करने मक्का गए हैं।

मक्का में शैतान को पत्थर मारने के दौरान अचानक मची भगदड़ में कई लोगों की जान तो सदमे से चली गई। सैकड़ों लोगों की भीड़ एक-दूसरे को रौंदते हुए भाग रही थी। लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते-कुचलते जा रहे थे। जब तक सुरक्षाकर्मी आगे बढ़ते, राहत और बचाव कार्य शुरू कराया जाता, सैकड़ों लोग जान गंवा चुके थे। लोगों को तड़प-तड़पकर मरते देख बलिया के फेफना क्षेत्र के डुमरी गांव निवासी मकबूल आलम (65) को दिल का दौरा पड़ गया। उन्हें वहीं मिट्टी दे दी गई।
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यह जानकारी दी है मक्का में जान गंवाने वाले मकबूल आलम के साथ गए दामाद शहनवाज ने। उन्होंने मक्का से फोन पर बताया कि शैतान को पत्थर मारते समय गुरुवार को अचानक भगदड़ मच गई। इस दौरान सैकड़ों की भीड़ एक-दूसरे के ऊपर गिरती चली गई। भीड़ में दबकर सैकड़ों लोगों की जान चली गई। चारों ओर मातम फैला था। एक हजार से अधिक लोग जख्मी हो चुके थे।

जो बच गया वो परवरदिगार से दुआ कर रहा था और जो जिन्होंने अपनों को खो दिया उन्हें तो मानो काठ ही मार गया। लोगों को तड़प-तड़पकर मरता मकबूल आलम भी नहीं देख सके। कैंप कार्यालय में उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। ऐसी ही हालत बहुतेरे जायरीनों की थी।
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