बलिया। गंगा यात्रा को लेकर एक तरफ जहां जिला प्रशासन पूरी ताकत से जुटा है वहीं गंगा किनारे के कई गांवों को नजरअंदाज कर दिया गया है। पंचायत राज अधिकारी कार्यालय (डीपीआरओ) से गंगा के किनारे स्थित जिन गांवोें की सूची जारी की गई है उनमें हनुमानगंज के आठ और सोहांव ब्लाक के दो गांवों का नाम नहीं है। स्थिति यह है कि इन वंचित गांवों में नमामि गंगे योजना के तहत अपेक्षित शौचालय नहीं बनवाए गए हैं। अधिकारीपांच वर्ष बाद बाद भी इस गलती को नहीं सुधार सके।
वर्ष 2014-15 में भारत सरकार की ओर से स्वच्छता अभियान को गति देने के लिए नमामि गंगे योजना को लागू की गई। हालांकि यह योजना पूरी तरह वर्ष 2015-16 में धरातल पर उतर सकी। इस योजना के तहत गंगा किनारे के गांवों को शौचालय से संतृप्त करने का प्रावधान किया गया और इसके लिए गांवों के चयन की प्रक्रिया शुुरू की गई। हैरानी की बात है कि पांच वर्षों बाद भी न तो गंगा किनारे के सभी गांव सूची में शामिल हो सके और न ही सूची में शामिल गांव शौचालय से ही संतृप्त हो सके। पंचायत राज विभाग की ओर से गंगा किनारे के पांच ब्लाकों सोहांव, दुबहड़, बेलहरी, मुरलीछपरा व बैरिया के कुल 41 गांवों का चयन किया गया। जबकि हनुमानगंज ब्लॉक के 8 और सोहांव ब्लाक के दो गांवों गांवों को सूची में शामिल नहीं किया गया। अब जब गंगा यात्रा निकालने की तैयारी की जा रही है तो अधिकारी डीपीआरओ की सूची को आधार मानकर चल कार्य कर रहे हैं।
चयनित नरही गांव गंगा से पांच किलोमीटर दूर
बलिया। नमामि गंगे योजना के तहत हनुमानगंज ब्लॉक के गांव रामपुर महावल, माल्देपुर, हैबतपुर, कोट अंजोरपुर, कोट मझरिया, भिखारीपुर, इंदरपुर, थम्हनपुरा का नाम डीपीआरओ की सूची में नहीं है। यही वजह है कि इन गांवों में नमामि गंगे योजना का संचालन भी नहीं किया गया। इसी तरह सोहांव ब्लॉक के बड़े गांवों में शुमार भरौली व गोविंदपुर गांव का नाम सूची में नहीं है और इन गांवों को नमामि गंगे योजना से वंचित रखा गया है। हैरानी की बात है कि सोहांव ब्लॉक के नरहीं गांव को नमामि गंगे योजना में रखा गया है जबकि यह गांव एनएच 31 और मगई नदी के बीच है और गंगा से करीब पांच किमी दूर है। गंगा व इस गांव के बीच कई गांव हैं जो सूची में नहीं हैं।
पांच वर्ष बाद भी पंचायती राज विभाग ने नहीं ली सुधि
बलिया। नमामि गंगे योजना के तहत पांच साल पहले गांवों का चयन किया गया लेकिन इसके बाद अधिकारी इसी लकीर के फकीर बने रहे और धरातल इसका कभी सत्यापन नहीं किया। अगर किया होता तो गंगा यात्रा जो प्रदेश के प्रमुख कार्यक्रम मेें शामिल है, इसकी सूची में नाम जरूर होता। डीपीआरओ कार्यालय से ही अधिकारियों को गांवोें की जो सूची भेजी गई है, उसी के आधार पर इन गांवों में नोडल अधिकारियों को तैनात किया गया है।
कोट
मामला संज्ञान में आया है। सूची से वंचित गंगा किनारे के गांवों में भी गंगा यात्रा को लेकर तैयारियां कराई जा रही हैं। नमामि गंगे की सूची से गांवों के वंचित होने के प्रकरण में कार्रवाई की जाएगी।-बीएन सिंह, सीडीओ, बलिया