स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत हो रहे गड़बड़झाला को रोकने का शासन ने माकूल इंतजाम किया है। शौचालय निर्माण के लिए जहां पात्रों को परिक्रमा नहीं करनी पड़ेगी वहीं ग्राम पंचायतें भी शौचालय निर्माण की धनराशि सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजेंगी। कुल मिलाकर जिले में शौचालय निर्माण के लिए प्रीपेड व पोस्टपेड सिस्टम लागू हो गया है।
स्वच्छता कार्यक्रम के तहत जिले में पिछले कई सालों से सरकार की ओर से गांवों में शौचालय निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लाभार्थियों का चयन व धनराशि भेजने का काम किया जाता है। वर्ष 2015-16 से जिले में नमामि गंगे व स्वच्छ भारत मिशन योजना का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत प्रति लाभार्थी 12 हजार देने का प्रावधान है।
बताया जाता है कि शुरुआत में पंचायती राज विभाग की ओर से शौचालय की धनराशि को सीधे ग्राम पंचायतों के खाते में भेज दी गई। लेकिन कई गांवों में शौचालय की धनराशि का आहरण करने के बावजूद शौचालय का निर्माण नहीं किया गया और धनराशि का गोलमाल कर दिया गया। हालांकि कई मामलों में जांच के बाद कार्रवाई भी की गई। इस गड़बड़ी को रोकने के लिए शासन ने ग्राम पंचायतों के खाते में भेजी गई धनराशि को लाभार्थियों के खाते में भेजने का प्रावधान किया है। इसके अलावा वैसे लाभार्थियों को भी शौचालय का लाभ मिलेगा जिसे प्रधान व सचिव की ओर से सहयोग नहीं किया जाएगा।
पोस्टपेड योजना के तहत लाभार्थी अब सीधे ब्लाक या डीपीआरओ कार्यालय को आवेदन देकर शौचालय की मांग कर सकते हैँ और जांच में पात्र होने पर उन्हें शौचालय निर्माण कराकर विभाग को सूचना देनी होगी। इसके बाद विभाग सीधे उनके खाते में 12 हजार की धनराशि हस्तांतरित कर देगा।