Lok Sabha Election: सपा की रणनीति अपने कोर वोटर के साथ ही ब्राह्मण मतों को अपने पक्ष में करने की है। सनातन पांडेय वर्ष 2007 में बलिया जिले की चिलकहर विधानसभा से विधायक बने थे। इसके बाद परिसीमन में चिलकहर विधानसभा का अस्तित्व समाप्त हो गया।
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बलिया लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी ने सस्पेंस खत्म करते हुए सोमवार को प्रत्याशी के नाम का एलान कर दिया। समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर ब्राह्मण कार्ड खेला है और सनातन पांडेय को अपना प्रत्याशी बनाया है।
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सनातन पांडेय चिलकहर विधानसभा से विधायक रह चुके हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी वो सपा-बसपा गठबंधन के प्रत्याशी थे। उन्हें भाजपा के वीरेंद्र सिंह मस्त ने लगभग 15 हजार मतों से हरा दिया था।
बलिया लोकसभा सीट से पिछले दिनों भाजपा ने राज्यसभा सांसद नीरज शेखर को अपना प्रत्याशी बनाया था।
इसके बाद से ही सपा के प्रत्याशी की घोषणा जल्द होने के आसार जताए जा रहे थे। पार्टी ने एक बार फिर सनातन पांडेय पर भरोसा जताया। हालांकि बलिया लोकसभा ब्राह्मण बहुल होने के बाद भी कभी भी यहां से ब्राह्मण को जीत नहीं मिली है।
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सनातन पांडेय ने रसड़ा विधानसभा से भी भाग्य आजमाया, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। 2019 के चुनाव में एन वक्त पर सपा ने उन्हें प्रत्याशी बनाया था। कांटे के मुकाबले में भाजपा के वीरेंद्र सिंह मस्त से लगभग 15 हजार मतों से हार गए थ।
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा से इनके अलावा अंबिका चौधरी, नारद राय, राम इकबाल सिंह और अवलेश सिंह भी दावेदारी कर रहे थे। सीट के समीकरणों को ध्यान में रख कर पार्टी ने फिर सनातन पर भरोसा जताया है।