नगरा के नरही गांव की सार्वजनिक पोखरी की जमीन को फर्जी तरीके से अपने नाम करवा कर बैंक से लाखों रुपये का लोन लेने और खुद को दिवालिया घोषित कर गबन करने का मामला सामने आया है।
डॉ. विजय नारायण सिंह के आवेदन पर कोर्ट के निर्देश पर रसड़ा पुलिस ने दयाशंकर सिंह, पुत्र राजेश सिंह और धर्मनाथ सिंह पत्नी हेमवंती देवी और रमाशंकर सिंह, पुत्र अजय सिंह, भगत सिंह, बहू पर मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
नरही निवासी डॉ. विजय नारायण सिंह ने कोर्ट में आवेदन देकर आरोप लगाया कि नरही मौजा निवासी दयाशंकर ने परगना सिकन्दरपुर गर्वी तहसील रसड़ा के ताल पोखरी में दर्ज सार्वजनिक उपयोगिता की भूमि को कूटरचित कागजात बनाकर राजस्व अभिलेख में अपना नामांतरण करा लिया।
तहसीलकर्मियों व बैंक कर्मियों से मिलीभगत कर पूर्वांचल बैक शाखा नरही से 2.98 लाख रुपये लोन लिया। पांच मार्च 2020 को राजेश सिंह निवासी नरही को देकर उर्वरक व्यवसाय बिहार में खोला गया। बाद में बड़ौदा यूपी बैंक शाखा नरही द्वारा उन्हें दिवालिया घोषित किया गया।
वहीं, दूसरे मामले में धर्मनाथ सिंह व उनकी पत्नी हेमवंती देवी निवासी नरही नगरा पर फर्जी जमीन के बंधक पत्र पर दो लाख 11 हजार रुपये लोन लेने का आरोप लगाया।
तीसरे मामले में डॉ. विजय नारायण ने नरही निवासी रमाशंकर सिंह, पुत्र अजय सिंह, पुत्र भगत सिंह, बहू श्रेया सिंह पर फर्जी तरीके से ताल की जमीन का नामांतरण कराकर बैंक से तीन लाख रुपये लोन लेकर फर्नीचर शॉप खोलने के नाम पर घोटाला करने का आरोप लगाया।
बैंक ने दिवालिया घोषित किया है। इस बाबत कोतवाली प्रभारी रामायन सिंह ने कहा कि कोर्ट के निर्देश पर आठ लोगों पर तीन अलग-अलग मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।