संत सुदिष्ट बाबा के आश्रम परिसर कोटवां गांव के पुरब सुदिष्टपुरी में लगने वाले धनुष यज्ञ मेला के प्रथम चरण में लगने वाला अश्व मेला खरीद बिक्री में अपने शुरुआती दौर मे ही शबाब पर है। यहां नए व पुराने दोनों तरह के नोटों से खरीद बिक्री होने से अश्वपालक व व्यापारी दोनों उत्साहित है। मेला प्रबंधक प्रधान जनक दुलारी देवी की तरफ से पहले ही यह घोषणा कर दी गई थी कि मेले में अश्व पीछे बिक्री पर कटने वाली रसीद के बदले में नए व पुराने दोनों तरह के नोट स्वीकार किए जाएंगे।
ऐसा ही करने का अनुरोध व्यापारियों व अश्व पालकों से भी किया गया था। जिसका असर है कि मेले में सेमरी, बक्सर, सहरसा, भोजपुर, खगडिय़ा, समस्तीपुर, गोपालगंज, सीवान, जहानाबाद, इलाहाबाद, वाराणसी, गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़ आदि दूर दराज से अश्व पालक व व्यापारी अपने अपने अश्वों को लेकर आये हैं।
मेले में शिवपुर कपूर दियर बयासी से अपनी घोड़ी लेकर आए रामेश्वर यादव अपनी घोड़ी की कीमत सात लाख है। अब तक उस पर पांच लाख रुपये में लेने पर ग्राहक तैयार है। सेमरी के अश्व व्यापारी रामजस ने बुधवार को दिन भर में ग्यारह घोड़े-घोड़ी बेचे। इस दिन मेले में ज्यादा संख्या में अश्वों की बिक्री हुई। जिससे उत्साहित और भी व्यापारी अपने अश्वों को लेकर आ रहे हैं। इलाकाई लोग जुट कर घुड़दौड का दिन भर आनन्द ले रहे है। मेले में आने वाले व्यापारियों व ग्राहको के लिये खाने पीने वाले सामानो व अश्वों के लिये उपयोगी सामानों की भी दूकानें लग गई है।
यह अश्व मेला तीन दिसंबर तक चलेगा। चार दिसंबर से मुख्य मेला शुरू होगा। ज्ञात हो कि परम्परागत ढंग से अश्व पालक व कृषक यहां दो तरह के घोड़ा घोड़ी खरीदते है। पहले तो शौकीन लोग आकर्षक अच्छे नस्ल का जिसकी कीमत काफी होती है। दूसरे कृषि उपयोग के लिये। खेतों मे जाने व बोझ लाने वाले। कुछ लोग अश्व शावक खरीद कर तैयार करते हैं और अच्छा मुनाफा लेकर बेचते हैं। व्यापारी यहां से तैयार अश्वों को गोविन्द साहब व अन्य जगह लगने वाले मेलों में ले जाते है।