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चकबंदी का खेल: तीन मृतकों सहित 120 लोगों पर FIR, वादी को पता ही नहीं; जांच और कार्रवाई की मांग

Tue, 10 Feb 2026 06:40 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।

सार

Ballia News: यह गड़बड़ी काफी चर्चा का विषय बनी हुई है। सीओ चकबंदी ने बताया कि न्यायालय नियमित नहीं चल पा रहा है। शिकायत आने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
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चकबंदी प्रक्रिया। - फोटो : istock
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विस्तार
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UP News: बलिया जिले में चकबंदी प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सीयर ब्लॉक के पिपरौली बड़ागांव में चकबंदी विभाग की मिलीभगत से तीन मृत लोगों के नाम से धारा 20 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है। कुल 120 ग्रामीणों पर मुकदमा दर्ज है। इस बारे में उनको भी जानकारी नहीं है।

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चकबंदी न्यायालय बेल्थरारोड में धारा 20 जोत चकबंदी अधिनियम के तहत तीन अलग-अलग मुकदमे दाखिल किए गए हैं। जिनमें करीब 120 ग्रामीणों को विपक्षी बनाया गया है। आरोप है कि जमीन की खरीद-बिक्री करने वालों ने ग्रामीणों के नाम का दुरुपयोग करते हुए मुकदमे दाखिल कर दिए। 

न तो नोटिस की तामीली कराई और न ही संबंधित व्यक्तियों को इसकी सूचना दी। तीन फरवरी को गांव निवासी राजेश कुमार चक परिवर्तन से संबंधित दावा करने चकबंदी न्यायालय पहुंचे। वहां अभिलेखों की जांच में मुकदमों का खुलासा हुआ। ग्रामीणों ने इस संबंध में एसडीएम को लिखित शिकायत देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

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केस 01 : गांव निवासी मनोज कुमार ने बताया कि उनके दादा गौरीशंकर और उनके भाई हरिशंकर का निधन करीब दो दशक पहले हो चुका है। इसके बावजूद दोनों के नाम से धारा 20 का मुकदमा दर्ज किया गया है। इतना ही नहीं, दोनों सहोदर भाइयों को मुकदमे में पिता-पुत्र दर्शा दिया गया है, जो तथ्यात्मक रूप से गलत है। मनोज कुमार के अनुसार, उनके दादा गौरीशंकर के तीन पुत्र थे, जबकि उनके भाई हरिशंकर निसंतान थे, लेकिन चकबंदी विभाग के संशोधन तालिका में पूरी वंशावली गलत दर्ज कर दी गई।

केस 02 : चकबंदी न्यायालय बेल्थरारोड में भूमि विवाद को लेकर रईसुन पत्नी निजामुद्दीन के नाम से धारा 20 का मुकदमा दाखिल किया गया है, जिसमें सालिहा खातून, बेबी, सईद खातून, सीमा, मोहम्मद मोहसिन, मोहम्मद अहसन, बनारसी, महेंद्र, गौरीशंकर, अमीरचंद, कपूरचंद समेत कुल 39 लोगों को विपक्षी बनाया गया है। जबकि वादी रईसुन का कहना है कि उन्हें इस मुकदमे की कोई जानकारी ही नहीं। उन्होंने एसडीएम को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि भूमाफिया से सांठगांठ कर फर्जी मुकदमा दर्ज कराया।

केस 03 : पिपरौली बड़ागांव की शबनम बेगम पत्नी अशफाक अहमद और इशरत बानो पत्नी स्वमोहम्मद जमीर के नाम से भी धारा 20 के तहत अलग-अलग मुकदमे दाखिल किए गए हैं। दोनों मामलों में 39-39 लोगों को विपक्षी बनाया गया है, जबकि दोनों कथित वादियों का कहना है कि उन्हें किसी भी मुकदमे की जानकारी तक नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि चकबंदी की आड़ में सुनियोजित तरीके से फर्जी मुकदमे दाखिल कर भूमि कब्जे की साजिश रची जा रही है। फिलहाल एसडीएम को शिकायत सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।

यह है धारा 20
धारा 20 उत्तर प्रदेश चकबंदी अधिनियम, 1953 की एक बहुत अहम धारा है। चकबंदी कार्यवाही के दौरान भूमि के अधिकार, शीर्षक, हिस्सेदारी अथवा अभिलेखीय प्रविष्टियों से संबंधित आपत्तियों के निस्तारण हेतु चकबंदी अधिकारी द्वारा विचारित की जाने वाली प्रारम्भिक वाद प्रक्रिया। यदि किसी किसान को आवंटित चक उसकी स्थिति, या क्षेत्रफल से असहमति है, तो वह इस धारा के तहत 15 दिनों के भीतर सहायक चकबंदी अधिकारी या चकबंदी अधिकारी के समक्ष आपत्ति दर्ज करा सकता है।
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एसआईआर के कार्य में व्यस्त होने के कारण न्यायालय नियमित नहीं चल पा रहा है। ऐसे मामले में फोन पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता। जानकारी मिलने पर जांच के बाद कार्रवाई होगी। - सुरेश कुमार मिश्र, सीओ चकबंदी बेल्थरा रोड।
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