बलिया। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के छोटे भाई कृपाशंकर सिंह (83) का शनिवार की सुबह दिल्ली में निधन हो गया। वह लंबे समय से हृदय रोग से पीडि़त थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही जिले में शोक की लहर दौड़ गई । वे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के अत्यंत प्रिय थे और आजीवन उनके साथ साए की तरह लगे रहते थे। निधन की सूचना मिलते ही उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई।
कृपाशंकर सिंह चार भाइयों में तीसरे नंबर पर थे। पहले रामनगीना सिंह, दूसरे चंद्रशेखर, तीसरे कृपाशंकर और चौथे भाई बद्री नारायण सिंह थे। कृपाशंकर सिंह के तीन पुत्र डॉ. नवीन सिंह, प्रवीण सिंह और बब्बू तथा एक एक पुत्री हैं। एक मई 1937 को पैदा हुए कृपा शंकरसिंह हृदय रोग से पीडि़त थे। वे देवस्थली विद्यापीठ के प्रबंधक और दूजा देवी महाविद्यालय की प्रबंध समिति के अध्यक्ष भी थे। इनके भतीजे नीरज शेखर भाजपा से सांसद और पौत्र रविशंकर सिंह पप्पू विधान परिषद के सदस्य हैं । कृपाशंकर सिंह के निधन की सूचना जैसे ही बलिया पहुंची, शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लग गया। देवस्थली विद्यापीठ के प्रधानाचार्य पीसी श्रीवास्तव ने विद्यालय के प्रबंधक के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
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संबल देती थी कृपा बाबा की छत्रछाया: रविशंकर सिंह पप्पू
चंद्रशेखर उद्यान में शेखर फाउंडेशन की ओर से आयोजित शोक सभा में विधान परिषद सदस्य रविशंकर सिंह पप्पू ने कृपाशंकर सिंह के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किया। उन्होंने कहा कि अध्यक्ष जी (पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर) के जाने के बाद कृपा बाबा की छत्रछाया हमें संबल देती थी लेकिन आज वे भी हमें छोड़कर चले गए। उनका जाना हमारे परिवार के लिए बहुत बड़ी क्षति है। इसकी भरपाई संभव नहीं है। वे हमारे लिए वट वृक्ष के समान थे। हर मुश्किल घड़ी में हमारे साथ खड़े रहते थे। समाजवादी विचारधारा से जुड़े लोगों के प्रति उनका लगाव था। कभी किसी पद की लालसा नहीं रखने वाले कृपा बाबा की कमी को अब कोई भर नहीं पाएगा। इस मौके पर पूर्व ब्लाक प्रमुख अनिल सिंह, अनिरुद्ध सिंह, मनोज सिंह, आलोक सिंह झुनझुन, उत्कर्ष सिंह, अमित सिंह बघेल, रविशंकर सिंह पिक्कू, विनोद सिंह, सुरेन्द्र कन्नौजिया, तेजा सिंह, जितेंद्र सिंह, विशाल नरायन सिंह आदि ने शोक जताया।
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जिले के लोगों को अभिभावक सा स्नेह देते थे कृपा जी: रामगोविंद
सपा के वरिष्ठ नेता व उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने भी कृपाशंकर सिंह के आकस्मिक निधन पर गहरा दु:ख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि कृपाशंकर सिंह बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उनके मृदुभाषी व्यक्तित्व व समतामूलक विचारधारा को भुलाया नहीं जा सकता। वे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की राजनीतिक व्यवस्थाओं को बखूबी संभालते थे। जिले के लोगों को दिल्ली में वे अभिभावक सा अपनत्व देते थे। कहा कि कई-कई दिनों तक हम लोगों ने दिन रात जाग कर चंद्रशेखर के प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान अनेकों कार्यक्रम को संचालित किया था। उनके स्नेह, सहयोग और आत्मीयता को भुलाना कठिन होगा। सपा नेता जयदीप यादव, राणा प्रताप सिंह, निर्मल सिंह, सुशील कुमार पांडेय कान्हजी आदि ने भी शोक संवेदना व्यक्त की है।
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विश्वविद्यालय में हुई शोक सभा
कृपाशंकर सिंह के निधन की सूचना मिलते ही शोक सभा कर उनको श्रद्धांजलि देने वालों की होड़ लगी रही। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में अतुल सिंह की अध्यक्षता में हुई शोक सभा में कृपाशंकर सिंह के व्यक्तित्व व कृतित्व की चर्चा की गई और उनके निधन पर दुख प्रकट किया गया। विधान परिषद सदस्य रविशंकर सिंह पप्पू के प्रतिनिधि रविशंकर प्रभात, पिक्कू सिंह ने कृपाशंकर सिंह के निधन को अपूरणीय क्षति बताया।