कर्बला के 72 शहीदों और प्यासों की याद में सोमवार को अपराह्न विशुनीपुर स्थित इमामबाड़े से अंजुमन हशमिया के तत्वावधान में चेहल्लुम अमारी जुलूस निकाला गया। जो निर्धारित मार्गों से होते हुए शिया जामा मस्जिद पहुंचकर सलाम के रूप में समाप्त हो गया।
जुलूसे अमारी के पूर्व इमामबाड़े में कर्बला के प्यासे शहीदों को खराजे अकीदत पेश करते हुए दिल्ली से आए धर्मगुरु अदिब हसन रिजवी ने कहा कि इस्लाम धर्म के प्रवर्तक पैगंबरे इस्लाम मुहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसेन जो कर्बला में अपने पूरे कुनबे की शहादत का नजराना पेश कर दिया।
मौलाना ने कहा कि आतंक देशद्रोह में शिया समुदाय के लोग कभी विश्वास नहीं करते। कहा कि शिया मुसलमानों के जन्म का मकसद ही इमाम हुसेन की शहादत पर आंसू बहाना है।
जंजीरी मातम के समय विशुनीपुर चौराहे पर शिया समुदाय के युवाओं नेे अपने शरीर को जंजीरों से पीट-पीटक र लहुलुहान कर दिया। इसे देखने के लिए शहर के लोग काफी संख्या में उमड़े हुए थे।
इस मौके पर मुनीर हसन जैदी, मुर्शीद जैदी, डा. सलीस हैदर, रविश हैदर, आसिफ जैदी, नबी हैदर, अशद रज्जा, मौलाना खुर्शीद, दिलावर, फैजी, वहीं हिंदू समाज के आनंद सिंह, राजकुमार यादव, गोलू अग्रवाल, कृष्णा यादव आदि मौजूद रहे।