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पुलिस को गिरफ्तारी का कारण बताना जरूरी

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सिविल कोर्ट परिसर में आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर को संबोधित करते न्यायाधीश चंद्रभानु सिं? - फोटो : BALLIA
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फोटो सहित...
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अधिवक्ताओं को विधि सेवा का प्रशिक्षण
प्रशिक्षण शिविर में प्रथम अपर जनपद न्यायाधीश ने दी न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बलिया। दीवानी न्यायालय परिसर के एडीआर भवन में रविवार को जिला विधिक प्राधिकरण की ओर से आयोजित प्रशिक्षण शिविर में न्यायिक अधिकारियों ने अधिवक्ताओं को लीगल सर्विस, गिरफ्तारी पूर्व और गिरफ्तारी के स्तर के विषय पर विधि प्रावधानों के बारे में जानकारी दी।
प्रशिक्षण शिविर का आयोजन जिला सत्र न्यायाधीश गजेंद्र कुमार के निर्देश पर आयोजित किया गया। इस दौरान प्रथम अपर जनपद न्यायाधीश चंद्रभानु सिंह ने गिरफ्तारी पूर्व नागरिकों को मिले अधिकार के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि अगर कोई भी पुलिस अधिकारी किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी करने के लिए जाता है तो उसे गिरफ्तारी के कारण को बताना जरूरी है। अगर पुलिस किसी व्यक्ति को पूछताछ के लिए थाने में बुलाती है तो वह धारा 41 डी के तहत अपने अधिवक्ता के साथ थाने में जाकर थानाध्यक्ष के समक्ष बयान दे सकता है। अगर उसकी गिरफ्तारी की जाती है तो पूर्व में उसका आरोप बताया जाए कि उसकी गिरफ्तारी किन कारणों से की जा रही है। अगर उसके घर वालों को इसकी जानकारी नहीं होती है तो उन्हें भी सूचना से पुलिस अवगत कराएगी। कुछ मामलों की विवेचना क्षेत्राधिकारियों को करने का अधिकार सीआरपीसी में दी गई है। उन मामलों में थाने का कोई थानेदार या पुलिस अधिकारी उसके आरोपियों की गिरफ्तारी करता है तो आप उसे मना कर सकते हैं।
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अपर जनपद न्यायाधीश एफटीसी तृतीय विनोद कुमार ने कहा कि किसी व्यक्ति को बिना कारण अगर थाने में पुलिस लेकर आ जाती है तो आप महकमे के आला अफसरों के मेल या व्हाट्सएप पर इसकी सूचना दे सकते हैं। अगर पुलिस बिना जीडी में दर्ज किए पूछताछ के लिए कई दिनों तक किसी आरोपी को बुलाकर या उठाकर ले आती है तो वह कानून की दृष्टि में न्यायसंगत नहीं है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती रिचा वर्मा ने भी नामिका वकीलों को कानून से जुड़े विभिन्न पहलुओं के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर नामिका अधिवक्ता योगेश्वर यादव, संजय सिंह, त्रिभुवन नाथ, प्रदीप कुमार, अखिलेश पांडेय, अवध नारायण यादव आदि रहे।
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