बलिया। जिले के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में कार्मिकों की नियुक्ति, भुगतान में अनियमितता और संबंधित पत्रावलियों को सुरक्षित नहीं रखने और शैक्षिक सत्यापन के बगैर कार्मिकों के मानदेय का भुगतान करने को लेकर दायर याचिका पर उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में महानिदेशक, स्कूल शिक्षा, उप्र ने तत्कालीन तीन बेसिक शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ मंडल को जांच सौंपी है।
आरोप है कि जनपद बलिया में वर्ष 2011 में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के कार्मिकों की नियुक्ति में अनियमितता बरतने एवं कार्मिकों के आवेदन पत्र, अभिलेखों को सुरक्षित न रखने तथा सम्बन्धित बोर्ड से शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन कराये बिना सम्बन्धित कार्मिकों मानदेय का भुगतान करने सम्बन्धी अनियमितताओं हेतु प्रथम दृष्टया उत्तरदायी पाये जाने के उपरांत शासन के स्कूल शिक्षा के महानिदेशक ने तत्कालीन बीएसए रमा शंकर राम के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही के लिए मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, आजमगढ़ को पदेन जांच अधिकारी नामित किया है। इसी मामले में तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी बलिया मनोहर प्रसाद के खिलाफ भी अनुशासनिक कार्यवाही करने की जिम्मेदारी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक को शासन ने दी है। जबकि वर्ष 2015-16 में जिले में चर्चित बीएसए रहे राकेश सिंह पर भी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में कार्मिकों की नियुक्ति में अनियमितता बरतने एवं कार्मिकों के आवेदन पत्र व अभिलेखों को सुरक्षित नहीं रखने तथा सम्बन्धित बोर्ड से शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन बिना सम्बन्धित कार्मिकों मानदेय का भुगतान करने के आरोप हैं। शासन ने संबंधित अनियमितताओं के लिए प्रथम दृष्ट्या उत्तरदायी पाए जाने के दृष्टिगत तत्कालीन बीएसए राकेश सिंह, वर्तमान में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वाराणसी के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के लिए मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक आजमगढ़ पदेन जांच अधिकारी नामित किया है।