हाईस्कूल अंग्रेजी विषय का हल कापी की जानकारी के बाद अमर उजाला कार्यालय में हल कापी की प्रतियां दे
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बलिया। जिले में हाई स्कूल अंग्रेजी का पेपर आउट होने का मामला शासन तक पहुंच गया है। रविवार को शासन के निर्देश पर अपनी टीम के साथ बलिया पहुंची ज्वाइंट डायरेक्टर माध्यमिक शिक्षा आजमगढ़ मंडल अनारपति वर्मा व क्षेत्रीय सचिव माध्यमिक शिक्षा वाराणसी सतीश सिंह ने जांच शुरू कर दी। इसमें कई अधिकारियों का नपना तय माना जा रहा है। अमर उजाला के 23 फरवरी के अंक में नकल पर नकेल की जगह पत्रकारों की हो रही निगरानी वाली खबर में छपे मोबाइल नंबर के आधार पर जांच टीम सुराग लगाने में जुटी है।
जेडी अनारपति वर्मा ने पेपर आउट, सीसीटीवी कैमरे तोड़े जाने, चपरासी के द्वारा सूचना दिए जाने आदि घटनाओं की सूचना नहीं देने को लेकर डीआईओएस से पूछताछ की। बलिया में हो रही गतिविधियों की जानकारी न देने के बारे में डीआईओएस भाष्कर मिश्र संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इससे जेडी का पारा चढ़ गया उन्होंने सबके सामने डीआईओएस को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि ऐसा क्यों हो रहा है कि परीक्षा से जुड़ी कोई भी जानकारी उन्हें मीडिया से मिल रही है। उन्होंने कहा कि आपको हर सूचना मुझे फोन से देनी चाहिए थी। इसके अलावा टीम जीजीआईसी में बनाये गए कंट्रोल रूम भी गई। जेडी और सचिव के जनपद में होने की सूचना पर कुछ लोग जेडी से मिलने पहुंच गए। उन्होंने सेंटरों पर सामूहिक नकल, चपरासी द्वारा केंद्र पर टीम के पहुंचने की सूचना देने आदि के साथ पत्रकार को धमकाने आदि को लेकर जेडी से सवाल दागे तो वे भौचक रह गईं। उन्होंने ऐसी कोई भी सूचना होने से इंकार करते हुए डीआईओएस से पूछा कि उन्होंने इन घटनाओं की जानकारी आखिर उन्हें क्यों नहीं दी। अमर उजाला कार्यालय में पहुंची जेडी ने वायरल अंग्रेजी के पेपर की हल कॉपी की मांग की तो उन्हें उसका प्रिंट उपलब्ध करा दिया गया। इस दौरान उन्होंने साफ-साफ कहा कि मीडिया सूचना का माध्यम होता है और उसका काम है सूचना देना। जांच आदि के नाम पर मीडिया को धमकाने का प्रयास करना और बेवजह पूछताछ कहीं से भी उचित नहीं है और ऐसा नहीं होने दिया जाएगा।
उधर, पेपर आउट मामले की जांच के लिए दोनों अधिकारियों के बलिया आने से डीआईओएस कार्यालय में रविवार को हड़कंप की स्थिति रही। सूत्रों के अनुसार जांच शुरू होने के कारण अधिकारियों के हाथ पांव फूले हुए हैं। जेडी के कार्यालय से जाने के बाद भी कई बाबू अपनी टेबुलों पर बैठकर कागजों को दुरुस्त करने में जुटे रहे कि कहीं किसी जांच में उनकी गर्दन न फंस जाए।