जिले के स्वास्थ्य महकमा में सबकुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है। सरकार का फरमान है कि सीएचसी तक में रक्त की जांच आदि की सुविधा मरीजों को मुहैया कराई जाए। जबकि यहां तो जिला महिला अस्पताल में बीते एक पखवारे से खून जांच बंद है। जिम्मेदार मशीन खराब होने का हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ रहे है। जबकि रक्त की जांच बंद होने से मरीजों को प्राइवेट पैथालॉजी जाना पड़ रहा है। मामूली जांच के लिए भी प्राइवेट पैथालॉजी संचालक महिला मरीजों से मोटी रकम वसूल रहे है।
अस्पताल प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि यह सारी कवायद अस्पताल प्रशासन की मिलीं भगत से हो रही है। इसके एवज में निजी पैथालॉजी संचालक संबंधित चिकित्सकों को कमीशन के तौर मोटी रकम मुहैया कराते है। यहीं नहीं लंबे समय से जिला महिला अस्पताल में लंबे समय से अल्ट्रासाउंड भी मशीन खराब होने का हवाला देकर बंद कर दिया गया है।
बोले मरीज, नाम सरकारी काम प्राइवेट जैसा
कोतवाली थाना क्षेत्र के सहरसपाली गांव निवासी मरीज अनिता यादव ने बताया कि अस्पताल में मशीन खराब होने से बुहत परेशानी का सामना करना पड़ता है। सहोदरा निवासी रागिनी सिंह ने बताया कि जिला महिला चिकित्सालय में आए दिन ऐसी समस्या बनी रहती है। यह केवल नाम का सरकारी अस्पताल है काम सब प्राइवेट है। चितबड़ागांव निवासी मंजू देवी ने बताया कि जिला महिला चिकित्सालय में केवल नाम का निशुल्क इलाज होता है, जिसके पास पैसा नहीं रहेगा उसका इलाज संभव ही नहीं है। सुखपुरा निवासी पूनम सिंह ने बताया कि भले ही सरकार लाख दावे कर ले स्वास्थ्य व्यवस्था वर्तमान में पूरी तरह से ध्वस्त है। हम जैसे गरीब मरीजों को पैसा देकर बाहर जांच करानी पड़ रही है।