इस बार विधानसभा चुनाव में प्रमुख राष्ट्रीय दलों के अलावा कई निर्दल प्रत्याशी भी मैदान में उतरे हैं। इसमें कुछ ऐसे निर्दल प्रत्याशी हैं, जो राष्ट्रीय दलों से टिकट नहीं मिलने के बाद बागी होकर चुनाव लड़ रहे हैं। क्षेत्रों में उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। राष्ट्रीय दलों के नेता भी इससे सशंकित हैं। जनपद के कुछ सीटों पर पूर्व के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी कई उलेटफेर के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। कई ऐसे मौके आए जब जनता ने राष्ट्रीय दलों के नेताओं को दरकिनार कर निर्दल प्रत्याशी को सिर आंखों पर बैठाकर उन्हें जीत दिलाई।
बलिया नगर सीट से वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में मंजू सिंह निर्दल प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं तथा जनता का विश्वास जीतने में कामयाब रहीं। इस दौरान उन्होंने सभी राष्ट्रीय दलों के नेताओं को न सिर्फ मात दिया बल्कि 7001 वोट से निकटतम प्रतिद्वंद्वी से जीत हासिल की थी। इस बार के विधानसभा चुनाव में भी कुछ ऐसे प्रत्याशी हैं जो राष्ट्रीय दलों से टिकट नहीं मिलने पर निर्दल मैदान में उतरे हैं।
ऐसे लोगों के बारे में बात करें तो बैरिया विधानसभा सीट से सपा से टिकट नहीं मिलने पर पूर्व जिला महासचिव मनोज सिंह ने निर्दल प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल किया है। इसके अलावा जिला पंचायत सदस्य आशनी सिंह भी निर्दल प्रत्याशी के रूप में मैदान में है। यूं तो आशनी सिंह पहली बार चुनाव लड़ रही हैं, लेकिन पारिवारिक पृष्ठभूमि रसूखदार होने की वजह से चर्चा में हैं। बांसडीह विधानसभा सीट से भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर बागी होकर निर्दल प्रत्याशी के रूप में उतरीं केतकी सिंह भी ताल ठोक रही है।
इसके अलावा सहतवार नगर पंचायत चेयरमैन के पुत्र नीरज सिंह गुड्डू और भासपा से टिकट के दावेदार माने जा रहे संजय कुमार सिंह भी निर्दल प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे हैं जो जीत के लिए दिन रात एक किए हुए हैं।बलिया नगर से बसपा से टिकट कटने के बाद साथी रामजी गुप्ता भी बागी होकर निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव में ताल ठोक रहे हैं। सिकंदरपुर विधानसभा सीट की बात की जाए तो यहां भाजपा से टिकट नहीं मिलने पर बागी हुए अरविंद राय भी निर्दल प्रत्याशी के रूप में उतरे हैं । निर्दल प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे तमाम दिग्गज किसी भी सीट पर उलेटफेर कर सकते हैं। चुनावी रणभूमि में कुछ विधानसभा सीटों पर राष्ट्रीय दलों के प्रत्याशियों से निर्दल प्रत्याशियों का सीधा मुकाबला होने की भी चर्चा है।