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Ballia News: कलिकाल में मंत्र जाप से बड़ा कोई धर्म नहीं

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दया छपरा। ग्राम सभा के काली मंदिर पर आयोजित शतचंडी महायज्ञ के प्रवचन में संत बालक बाबा ने बताया कि ईश्वर का भक्ति काल में परिवर्तन हो सकता है। कर्म में नहीं। बताया कि मनुष्य में कभी-कभी समय का अभाव हो सकता है, लेकिन क्रिया में अभाव नहीं होना चाहिए।
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कलि काल में मंत्र जाप से बड़ा कोई धर्म नहीं है। अन्य मंत्रों के लिए तो नियम कानून बनाए हैं। लेकिन ब्रह्मा के मुख से निकला हरे राम, राम-राम हरे-हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण-कृष्ण हरे हरे। इस मंत्र का जप करने के लिए कोई भी नियम कानून नहीं बनाया है।
आप सोते या बैठे शुद्ध काल में या अशुद्ध काल में दोनों में मंत्र जाप करके अपना और अपने कुटुंब का कल्याण कर सकते हैं। नाम जाप में कोई शर्त नहीं है। पर दूसरी भक्ति में शर्त है। प्रेम के बिना सत्संग नहीं हो सकता। बिना सत्संग की भक्ति नहीं होगी। यही भक्ति की सीढ़ी है। उन्होंने बताया कि इसी अवधारणा को लेकर ब्रह्मलीन संत हरे राम ब्रह्मचारी खोपड़िया बाबा हरिहरानंद स्वामी अखंड नहीं बरसों बरस तक इस मंत्र का जाप का कार्य करते आ रहे हैं। इसलिए क्षेत्र वासियों से अपील है कि इस महामंत्र का जाप आप हमेशा करते रहें, इससे जीव के साथ-साथ संसार का भी कल्याण हो जाएगा।
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