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ढाई साल में हो पाया था सिर्फ पांच पायों का निर्माण

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सिकंदरपुर। उत्तर प्रदेश-बिहार को जोड़ने वाले खरीद-दरौली घाट के मध्य बनने वाले पक्के पुल का शिलान्यास अक्तूबर 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था। इसके बाद प्रथम किस्त के रूप में 17 करोड़ रुपये जारी हुएए थे। तब पुल निर्माण की कुल लागत लगभग 162 करोड़ रुपये बताई गई थी। निर्माण कार्य की रफ्तार धीमी रही। कार्यदायी संस्था ने कुल ढाई साल में महज पांच पायों का निर्माण कराया था। पुल निर्माण में तेजी की मांग को लेकर आंदोलन के बाद भाजपा विधायक संजय यादव ने पुल के काम में तेजी के लिए धन दिलवाने का वादा कर लोगों शांत कराया था। इसके बाद सात करोड़ रुपये जारी किए गए। पैसे आने के बाद फिर कार्य में तेजी आई, लेकिन दस जून को पुल के दो पाए टेढ़े हो गए। पूर्व मंत्री व वरिष्ठ सपा नेता मोहम्मद रिजवी समर्थकों के साथ पुल का जायजा लेने पहुंच गए। उन्होंने निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया। धांधली की शिकायत प्रदेश सरकार से शिकायत की गई थी।
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ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश और बिहार के सैकड़ो गांव एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। इनकी आपस में रिश्तेदारियां भी हैं। बरसात के दिनों में महज 10 किलोमीटर की दूरी के लिए इलाके के लोगों को 80 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। यदि पुल बन गया तो सिकंदरपुर से सीवान की दूरी मात्र 30 किलोमीटर रह जाएगी। वहीं बिहार के दरौली, डुमरहरह, अमरपुर, किशुनपाली, कशिला, पतार सहित दर्जनों गांव के लोग के लिए बाजार आदि के लिए भी सिकंदरपुर आसानी से आ सकेंगे।
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