जिले का द्वाबा इलाका इन दिनों लाल बालू की तस्करी के मशहूर हो चुका है। पुलिस की मिलीभगत से माफिया खुलेआम सड़क से लेकर नदियों के रास्ते बिहार से लाल बालू की तस्करी को अंजाम दे रहे हैं। लाल बालू समेत विभिन्न तरह की तस्करी के लिए भरौली तथा बैरिया का गंगा पुल माफियाओं के लिए महफूज रास्ता है।
हालांकि वर्तमान में वन विभाग की चौकसी तथा मंत्री की फटकार के बाद भरौली के रास्ते लाल बालू के कारोबार पर कुछ हद तक लगाम लगी है लेकिन बैरिया गंगा पुल तथा नदियों के रास्ते धड़ल्ले से लाल बालू की तस्करी की जा रही है। आलम यह है कि द्वाबा के लालगंज, दोकटी आदि इलाके में बालू को तस्करी करके लाया जाता है और यहां से ट्रकों पर लादकर जनपद के विभिन्न बाजारों के अलावा पड़ोसी जिले मऊ तथा आजमगढ़ तक भेजा जा रहा। बताया जाता है कि लालगंज के पास ही जानकी बाजार में लाल बालू को डम्प किया जाता है जो बिहार प्रांत का क्षेत्र है और महज कच्ची पगडंडी ही सीमा तय करती है। इसका लाभ लाल बालू के तस्कर खूब उठाते हैं।
सूत्रों की मानें इन दिनों लालगंज के पास पट्टी घाट तथा शिवपुर घाट पर दिन और रात नाव से लाल बालू ला कर ट्रैक्टरों के जरिए बैरिया से लालगंज के बीच जगह-जगह डम्प किया जा है। फिर इसे ट्रकों के जरिए विभिन्न बाजारों तक पहुंचाया जाता है। इसको लेकर पुलिस और परिवहन विभाग संज्ञान में लेने के बाद भी कार्रवाई नहीं करता।
कयास लगाए जा रहे हैं कि कई सफेदपोश भी इस कारोबार में शामिल हैं। लोगों की मानें तो यह सारा खेल पुलिस की मिलीभगत से हो रहा। मोटी कमाई के कारण इस अवैध कारोबार को बंद कराने का प्रयास पुलिस नहीं कर रही। जबकि माफिया भी बेखौफ हैं।