बलिया। साइबर ठग और हैकर लालच देकर लोगों को लूट रहे हैं। साइबर फिशिंग व हैकिंग की वारदातों में लगातार इजाफा हो रहा है। छह महीने में साइबर ठगी की 205 शिकायतें पुलिस को मिली हैं, जिनमें 15 लाख रुपये से अधिक की रिकवरी पुलिस ने कराई है।
हैकर मनोवैज्ञानिक तरीके से लोगों को फंसाकर खाते से रकम उड़ा देते हैं। कुछ मामलों में पुलिस ठग का पता लगा लेती है लेकिन ज्यादातर मामलों में उनके दूर होने के कारण पुलिस भी कुछ नहीं कर पाती है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि तत्काल साइबर सेल में संपर्क करने पर ली गई रकम लौटाई जा सकती है लेकिन देर होने पर दिक्कत होती है। साइबर सेल के अमर नाथ मिश्र के मुताबिक कोरोना काल में इस तरह अपराध में इजाफा हुआ है। जनवरी से अब तक पोर्टल पर ऑनलाइन 205 शिकायतें आईं। इनमें से 39 सोशल मीडिया से जुड़ी और शेष बैंक धोखाधड़ी की थीं। इनमें से 19 मामलों में 1531501रुपये की रिकवरी कराई है।
साइबर सेल के अधिकारियों का कहना है कि फेसबुक क्लोनिंग, इंस्टाग्राम फिशिंग, ओएलएक्स पर एडवांस भुगतान करवाना, सोशल साइट या मोबाइल पर आने वाले ऑफर, ऑनलाइन लोन, विदेशी नंबरों से आने वाली मिस्ड कॉल, वैवाहिक विज्ञापन, पासवर्ड पूछकर ठगी होती है। इसके अलावा अब कोरोना के टीके के नाम पर भी ठग सक्रिय हो गए हैं। बैंकों या फोन की केवाईसी के नाम पर भी ठगी होती है।
बीते 22 जून को बैरिया थाना क्षेत्र के चकिया गांव निवासी सोनू साह व्यवसायिक कार्य के लिए पंजाब नेशनल बैंक आरटीजीएस के द्वारा 10.39 लाख रुपये का भुगतान किया। किसी तरह की त्रुटि के चलते रकम किसी दूूसरे के खाते में चली गई। इसकी शिकायत उन्होंने पुलिस से की, जहां से मामला साइबर सेल का स्थानांतरित कर दिया गया और सेल द्वारा तत्परता दिखाते हुए बैंक से पत्राचार कर धन की रिकवरी कराई।
बीते माह 16 जून को नगरा थाना क्षेत्र के चंदवाक दुबौली गांव निवासी राघवेंद्र राजभर ने यूपीआई से किसी वायलेट में 18 हजार पांच रुपये स्थानांतरित हो गए थे। इसकी लिखित शिकायत पीड़ित द्वारा पुलिस से की गई थी, जहां से मामला साइबर सेल को स्थानांतरित कर दिया गया और साइबर सेल ने तत्परता दिखाते हुए धनराशि खाते में रिवर्स कराई।
साइबर अपराध पर जागरूकता के बगैर नकेल संभव नहीं है। अपराधी आजकल सोशल मीडिया पर लुभावने आफॅर के द्वारा सहज ही आम आदमी को अपना शिकार बना रहे है।
राजेश कुमार मिश्र, प्रभारी साइबर सेल।