आजमगढ़। डीएम रविंद्र कुमार ने मंगलवार को कहा कि खेत में धान की पराली, गन्ने की पत्ती व अन्य अपशिष्ट जलाना अपराध है। ग्राम प्रधान व क्षेत्रीय लेखपाल अपने क्षेत्र में फसल अवशेष जलाने की घटनाएं न होने दें। ऐसा होने पर वह स्वयं जिम्मेदार होंगे। डीएम ने बताया कि पराली जलाने से मृदा स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। मानव स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। इसके रोकथाम के लिए जिला स्तर पर एक सेल का गठन किया गया है। किसान कृषि विभाग के कार्मिकों से सुझाव लेकर फसल अवशेष को कृषि यंत्रों व वेस्ट डी- कंपोजर के माध्यम से खेत में मिलाकर कंपोष्ट खाद बनाएं।
इससे मिट्टी की सेहत सुधरेगी और उत्पादन भी अच्छा होगा। अगर पराली प्रबंधन यंत्र लगाए बिना धान की कटाई करते कंबाईन हार्वेस्टर पाए गए तो सीज किए जाएंगे। पराली जलाने की अब तक जिले में 11 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। दोषी किसानों पर 17500 रुपये का जुर्माना भी लगाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि किसान फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 9454417172, 9415208288 नंबरों पर जानकारी ले सकते हैं। संवाद