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कहीं आड़े आई महंगाई तो कहीं खाते में पहुंचा ही नहीं धन

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बलिया। भले ही जिले में ठंड का प्रकोप बढ़ता जा रहा हो, लेकिन अधिकांश परिषदीय विद्यालय के बच्चों को अब भी बिना स्वेटर और जूता मोजा के स्कूल आना पड़ रहा है। क्योंकि अधिकांश अभिभावकों के खाते में डीबीटी के माध्यम से जरुरी धन नहीं आया है और जिनके खाते में आया भी है। उनको उस कीमत में स्कूल ड्रेस, बैग, जूता-मोजा खरीदना भारी पड़ रहा है। यही कारण जिले के परिषदीय स्कूलों के अधिकांश बच्चे अब भी बिना यूनिफार्म के आ रहे हैं। इनमें से कई बच्चों के अभिभावकों को अब भी इस मद में धनराशि नहीं मिली है। जिन्हें मिली है, वे भी जूता-मोजा, स्वेटर बैग खरीदने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इससे सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना पर ही सवालिया निशान लग रहा है। हालांकि विभागीय लोगों का कहना है कि अभिभावकों को इन सामान को खरीदने के लिए प्रेरित करने का निर्देश शिक्षकों को दिया गया है।
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जिले में 2249 परिषदीय विद्यालय हैं, जहां करीब 3,12,632 छात्र नामांकित हैं। यहां के 1,98,745 छात्रों को अब भी डीबीटी के जरिए मिलने वाली धनराशि नहीं मिली है। नामांकित छात्रों के सापेक्ष अब तक केवल 1,14,897 लाख छात्रों के अभिभावकों के खाते में ही अक्तूबर में धन भेजा गया है। धन भेजे हुए करीब एक माह से अधिक का समय हो चुका हैं। इसके बावजूद अधिकांश अभिभावकों ने जूता-मोजा, स्कूल बैग, ड्रेस और स्वेटर की खरीदारी नहीं की है। परिणाम स्वरूप ठंड शुरू होने के बावजूद नौनिहाल हवाई चप्पल व पुराने यूनिफार्म में ही विद्यालय आ रहे हैं। बीएसए शिव नारायन सिंह बताते हैं कि डीबीटी से अभिभावकों के खाते में धन भेजने की व्यवस्था की गई है। अभिभावकों से अपील की जा रही है कि वह खरीदारी इसी सप्ताह अवश्य कर लें।
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अभिभावक बोले, इतने पैसे में कैसे होगी खरीदारी
शासन की ओर से बच्चों के लिए खरीदे जाने वाले हर सामान की कीमत का आंकलन किया गया है। इसमें 600 रुपये में दो सेट यूनिफार्म, 175 रुपये में बैग, 200 रुपये में स्वेटर व 125 रुपये में जूता-मोजा खरीदना है। बेला निवासी काशीनाथ राजभर ने बताया कि अब तक उनके खाते में पैसा नहीं आया है। जसांव निवासी रामलाल कुंवर ने बताया कि इस महंगाई में दो सेट यूनिफार्म की सिलाई ही चार सौ रुपये हो जाएगी कपड़े खरीद कर सिलाई सहित तो लगभग सात सौ रुपये हो जाएगा। शेष चार सौ में जूता मोजा, बैग, स्वेटर कैसे खरीद पाएंगे। रघुनाथपुर निवासी वकील पासवान का कहना है कि अब तक उनके पास पैसे नहीं आए हैं। जैसे ही पैसे आएंगे, जरूरी सामान खरीद लेंगे। हरिपुर निवासी कमल गिरी ने कहा कि अभी उनके खाते में धन नहीं आया है तो कहां से यह सामान खरीदें।
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बोले दुकानदार....
महंगाई बढ़ने से और खाते में पैसा नहीं आने से ड्रेस खरीदने के लिए अभिभवक कम आ रहे है। वर्तमान में स्कूल बैग की कीमत विभाग द्वारा तय मूल्य से कहीं अधिक हो गई है।
सुनील कुमार, दुकानदार।
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सरकार ने जब ड्रेस, स्कूल बैग, स्वेटर और मोजा-जूता की कीमत तय की थी तब कोरोना का असर नहीं था। अब कोरोना के कारण सभी वस्तुओं खास कर पट्रोल डीजल की कीमतों में बड़ा इजाफा हुआ है। इसका असर ड्रेस सहित अन्य वस्तुओं पर पड़ा है।
योगेश गुप्ता, दुकानदार।
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डीबीटी पोर्टल पर शेष बचे हुए अभिभावकों का डाटा अपलोड किया जा रहा है। इस माह के अंत तक यह कार्य पूर्ण हो जाने की उम्मीद है। इसके बाद इन अभिभावकों के खाते में भी पैसे पहुंच जाएंगे। पूर्व में कुछ अभिभावकों के डाटा में कुछ गड़बड़ी थी, इसे संशोधित किया जा रहा है। शिक्षकों को यह निर्देश दिया गया है कि वह अभिभावकों को सामान खरीदने के लिए प्रेरित करें।
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-शिवनारायन सिंह, बीएसए, बलिया।
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