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बलिया की एक पहचान है विवि, इसको संजोए रखना हम सबकी जिम्मेदारी: डीएम

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चंद्रशेखर यूनिवर्सिटी तृतीय स्थापना दिवस पर जननायक चंद्रशेखर के प्रतिमा पर पूष्प अर्पित करते ज? - फोटो : BALLIA
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बलिया। मंडल मुख्यालय आजमगढ़ में विश्वविद्यालय नहीं है। ऐसे में यहां जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय होना जिले के लिए सौभाग्य का विषय है। यह विश्वविद्यालय जिले की पहचान है। इसको संजो कर रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। ये बातें जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने रविवार को जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के तृतीय स्थापना दिवस पर यूनिवर्सिटी सभागार में आयोजित संगोष्ठी में कहीं।
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संगोष्ठी का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही व कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि कुलपति व हमारी हर मुलाकात में विश्वविद्यालय के विकास पर चर्चा होती रही। आश्वस्त किया कि इसमें हर प्रकार का सहयोग रहेगा। कहा जिले में कई महापुरुष पैदा हुए। उनकी आशा, आकांक्षाओं व सपनों को रूप देने के लिए यहां एक केंद्र स्थापित करने की पहल हो। सीमित संसाधनों के बीच यहां आंतरिक गुणवत्ता बनाए रख संस्था के महत्व को बनाए रखकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने सराहनीय कार्य किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह ने कहा कि यह विश्वविद्यालय चुनौतियों को झेलते हुए भी शक्ति, साहस व सहयोग से अपने मुकाम की ओर अग्रसर है। तमाम दिक्कतों के बावजूद सफलतापूर्वक दीक्षांत समारोह सम्पन्न कराया गया। कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल भी यहां की व्यवस्था को देख पूरी तरह संतुष्ट थीं और उन्होंने खुले मंच से यह बात कह दी जो विश्वविद्यालय के लिए बड़ी बात है। कुलपति ने समस्त महाविद्यालयों को भी नकलविहीन परीक्षा व अन्य व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। साथ ही सभी से अपने महाविद्यालय में शिक्षा का और बेहतर माहौल बनाने की अपील की। संगोष्ठी में रजिस्ट्रार संजय कुमार, उप रजिस्ट्रार महेश कुमार, वित्त नियंत्रक प्रकाश सिंह, निर्माण निगम के जीएम अजय मिश्र, प्रो.सानंद सिंह, अमित यादव, ज्योति प्रकाश चौहान, प्रो.अखिलेश राय, अतुल सिंह आदि रहे।
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दीक्षांत समारोह की सफलता पर जताया आाभार : बलिया। कुलपति प्रो. योगेंद्र सिंह ने कहा कि जब यहां विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद आया तो यहां की दिक्कतें देख मैं चिंतित जरूर था, पर हिला नहीं। जब जलप्लावन की विभीषिका आई तो चिंता और बढ़ गई। लेकिन विश्वविद्यालय से जुड़े जिम्मेदार लोगों के अलावा स्थानीय ग्रामीणों ने सहारा दिया। कुलपति ने जिलाधिकारी का विशेष आभार जताते हुए कहा, यूनिवर्सिटी में जलभराव के बीच नाव से आकर यहां का दर्द जाना। यहां की समस्याओं को दूर करने पर चर्चा की। दीक्षांत समारोह की तैयारियों पर गंभीरता दिखाई और उसमें भरपूर प्रशासनिक सहयोग भी दिलाया। ऐसे में दीक्षांत समारोह के सफलतापूर्वक आयोजन का श्रेय भी काफी हद तक जिलाधिकारी को जाता है। वहीं, जिलाधिकारी ने भी कुलपति प्रो.योगेंद्र सिंह का कार्यकाल बढ़ने पर बधाई दी।
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