नगर में जुलूस के दौरान मातम मनाते शिया समुदाय के लोग।
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विशुनीपुर स्थित स्व. मुनीर हसन जैदी के इमामबाड़ा से जुलूसे चेहल्लूम निकाला गया। इस दौरान अजादारों ने जंजीरी मातम कर शहीदाने कर्बला का खिराजे अकीदत पेश की। इसे पूर्व हुई मजलिस में कर्बला के बयान सुनकर अजादार रो पड़े। जुलूस विभिन्न मार्गों से होते हुए जामा मस्जिद चौराहे पर पहुंचा। जहां अंजुमन हाशिमिया के संयोजन में अंजुमन गुलामे हुसैन जलपंथपुर, आजमगढ़ और अंजुमन इमामिया कोपागंज मऊ के सदस्यों ने जंजीरी मातम और नौहाख्वानी पेश की। इसके पूर्व स्व. जैदी के इमाम पर मजलिसे अजा बरपा हुई। जिसे मौलाना अल्लामा आजिम जौवरासी ने खिताब करते हुए कहा कि दुनिया में जहां भी इंसानियत नहीं है। वहां इस्लाम हो ही नहीं सकता। क्योंकि कर्बला में पैगंबरे इस्लाम मो. मुस्तफा के नवासे इमाम हुसैन ने अपने कुनबे और 72 साथियों के साथ दुनिया के तमाम रिश्तों की कुर्बानी दी। जिसमें छह माह के दुधमुंहे अली असगर तक की कुर्बानी शामिल है।
मजलसि के पूर्व नायाब बलियावी ने कलाम पेश कर लोगों की आंखें नम कर दीं। शहर कोतवाल शशिमौलि पांडेय के नेतृत्व में सुरक्षा के मद्देनजर फोर्स मौजूद रही। इस मौके पर आलेरजा, तहजीब हैदर, मंजर हुसैनाबादी, जैनुलआबेदीन, आसिफ जैदी, डा. साजिस जैदी, अली जैदी, हसरत, रबिश संजर, सभासद शकील अहमद, अजय आदि मौजूद रहे।