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सैकड़ों एकड़ भूमि समाई, चक्की नौरंगा के अस्तित्व पर खतरा

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दूबेछपरा में गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा बनाए गए बांध को काटतीं गंगा नदी की लहरें। - फोटो : BALLIA
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दयाछपरा। गंगा की उतरती लहरें बैरिया तहसील क्षेत्र के गंगा उस पार नौरंगा, भुवाल छपरा, चक्की नौरंगा के भगवानपुर मौजे में कटान कर अब तक सैकड़ों एकड़ खेती योग्य भूमि निगल चुकी हैं। अगर यही हाल रहा तो चक्की नौरंगा का तो अस्तित्व ही मिट जाएगा।
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भगवानपुर मौजे का कुल 710 एकड़ का रकबा है। इसमें गंगा की लहरें ने पूर्व में ही 300 एकड़ काट चुकी थीं। इस साल की कटान में 200 एकड़ फिर गंगा में समाहित हो गई। मौजे में मात्र 210 एकड़ जमीन बची है। इसमें चक्की नौरंगा गांव बसा है। ग्रामीणों ने बताया कि 1882 में भगवानपुर का संपूर्ण मौजा गंगा में विलीन हो चुका था। इसके बाद गंगा ने आबाद करते हुए छोड़ा तो 1930-31 मई को चक्की नौरंगा गांव भगवानपुर मौजे में बस गया। इसके बाद धीरे-धीरे 1955 में संपूर्ण मौजा आबाद हो गया। फिर गंगा की लहरों ने भगवानपुर मौजा में 2016-17 से तांडव मचाना शुरू कर दिया है। भुवाल छपरा निवासी रामाकांत ठाकुर ने बताया कि नौरंगा से चक्की नौरंगा की रास्तों में चार पुलिया बनाई गई थी। इसमें दो पुलिया तो पहले ही गंगा के भेंट चढ़ गई थी। इस साल आई बाढ़ व कटान में तीसरी पुलिया भी आधी कट गई है। चौथी पुलिया का भी कुछ अंश कट चुका है। अब नौरंगा से चक्की नौरंगा जाने का कोई मार्ग नहीं बचा। गंगा की लहरें कटान करते हुए हृदया ठाकुर के बगीचे के समीप पहुंच गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर गंगा की लहरों ने बैक रोलिंग की तो नौरंगा गांव भी कटान की जद में इसी साल आ जाएगा। बंधे पर बोरी से बांधकर मार्ग को बचाते हुए गांव को कटान से बचाया गया था। क्षेत्रीय लेखपाल सदन चौधरी बताया कि अब तक नौरंगा गांव में कुल 400 परिवारों को तिरपाल बांटा जा चुका है। मौसम ठीक होते ही भुवाल छपरा के ग्रामीणों में तिरपाल बांटा जाएगा। राशन लाने का कोई मार्ग न होने के कारण विलंब है। रास्ता ठीक होते ही राशन भी वितरित कर दिया जाएगा।
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