प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कोटवां का जर्जर भवन व आवास।
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बैरिया। स्थानीय विकास खंड में सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। अस्पतालों के भवन जर्जर हो गए हैं। डॉक्टरों की अपेक्षित तैनाती नहीं है। जहां हैं वहां समय से आते नहीं। एक अस्पताल की हालत तो ऐसी है कि वहां तैनात कर्मचारी उसी कैंपस के आयुर्वेदिक अस्पताल में बैठकर ड्यूटी की औपचारिकता पूरी करते हैं। चिकित्सकों व कर्मचारियों के लिए बने भवनों की छतें टपकती हैं। इस कारण कोई उनमें रहने को तैयार नहीं है। एक अस्पताल केवल फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। ऐसे में बेहतर इलाज को लेकर महकमा चाहे जो दावे करे लेकिन असलियत तो यहां के हालात खुद ही बयां करते हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सोनबरसा में सर्जन, प्रसुती रोग विशेषज्ञ, बाल रोग सहित चिकित्सकों के कुल नौ पद हैं। वर्तमान में यहां अधीक्षक डॉ. आशीष श्रीवास्तव व डॉक्टर अविनाश चौधरी सहित सिर्फ दो की तैनाती है। इनके अलावा संविदा पर तैनात बीएएमएस डा. अनिता यादव सप्ताह में तीन दिन अस्पताल आती हैं। स्टाफ नर्स के तीन पदों के सापेक्ष एक स्टाफ नर्स की तैनाती है। डिलीवरी कक्ष के लिए आया तक की तैनाती नहीं की गई है। सबसे बड़ी दिक्कत अस्पताल भवन के छत से पानी टपकना है। चिकित्सकों व कर्मचारियों के लिए बने आवास भी जर्जर हो गए हैं। बरसात में आवास के अंदर छत से पानी रुम में टपकता रहता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सोनबरसा के प्रांगण में 25 करोड़ 15 लाख रुपये की लागत से बनने वाले 100 बेड के अस्पताल का निर्माण कार्य धन के अभाव में विगत एक वर्ष से ठप था। विगत 15 दिन से राज्य निर्माण निगम ने अस्पताल भवन का निर्माण कार्य एक बार फिर शुरू कराया है।