बलिया। कोविड-19 को पूरी तरह से मात देने के लिए टीकाकरण बहुत जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए सबसे अधिक जोखिम वालों तक वैक्सीन पहुंचाने की हरसंभव कोशिश हो रही है। स्वास्थ्यकर्मियों और फ्रंट लाइन वर्कर्स के बाद अब सबसे अधिक जोखिम समूह में आने वाले 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों और गंभीर बीमारी से ग्रसित 45 से 59 साल के लोगों (सहरुग्णता युक्त व्यक्तियों) का टीकाकरण इस माह से चल रहा है। टीकाकरण की गति को बढ़ाने और समुदाय के लोगों को प्रेरित करने में अब आशा कार्यकर्ताओं और अन्य फ्रंट लाइन वर्कर्स की भी मदद ली जाएगी। यह जानकारी अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी/कोरोना के नोडल अधिकारी/जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ हरिनंदन प्रसाद ने दी।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने सूबे के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र जारी कर इस बारे में जरूरी निर्देश दिया कि कोविड-19 टीकाकरण में आशा कार्यकर्ताओं और अन्य फ्रंट लाइन वर्कर्स का सहयोग लिया जाए। जिले में एक मार्च से शुरू 60 वर्ष से अधिक उम्र वालों और बीमारी से ग्रसित 45 से 59 साल की लोगों के टीकाकरण के तहत 14 मार्च तक कोविड पोर्टल पर रजिस्टर्ड 7969 के सापेक्ष 7833 लोगों को (प्रथम डोज) दिया गया है। इसमें गति लाने के लिए जरूरी है कि समुदाय स्तर पर लोगों में जागरूकता लाई जाए और अधिक से अधिक लोगों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित किया जाए। इसके तहत आशा कार्यकर्ता व अन्य फ्रंट लाइन वर्कर्स समुदाय के लोगों को टीकाकरण के लाभ और कोविड-19 से बचाव के तरीकों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी पहुंचाएं। बताया कि फ्रंट लाइन वर्कर टीकाकरण के निकटतम सत्र स्थल के चिह्नित स्थान, तिथि और समय की जानकारी समुदाय के लोगों तक पहुंचाने के साथ ही सत्र स्थल पर जाने के लिए प्रेरित करें। इसके अलावा, टीकाकरण के लिए नियमानुसार अपडेटेड ड्यू लिस्ट तैयार की जाए। लाभार्थियों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में मदद की जाए और छूटे हुए लाभार्थियों की सूची प्रभारी चिकित्साधिकारी तक पहुंचाई जाए। यदि किसी परिवार में टीकाकरण को लेकर कोई भय या भ्रांति है। इसके कारण वह टीका लगवाने को राजी न हो रहे हों तो उनकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी जाए ताकि वह उनकी भ्रांतियों को दूरकर टीकाकरण के लिए राजी कर सकें।