वीर लोरिक स्पोर्ट्स स्टेडियम में होती आतिशबाजी।
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दीपों का पर्व दीपावली रविवार को पूरे जिले में धूमधाम से मनाया गया। सुबह उठकर लोगों ने घरों की साफ-सफाई की, उसके बाद शाम को लक्ष्मी-गणेश जी की पूजा कर परिवार की सुख समृद्धि की कामना की। रात में लोगों ने पटाखे छोड़े। दीपावली को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। इस दौरान बच्चों ने पटाखे छोड़े। सुरक्षा की दृष्टिकोण से अभिभावक छोटे बच्चों के साथ खड़े रहे। वहीं बड़े बच्चे एटम बम, रॉकेट, लाइटर, बड़ा बम आदि बजाया। वहीं छोटे बच्चों ने फुलझड़ी, महुआ, चिटपुटिया आदि पटाखे बजाया। इस दौरान अधिकांश अभिभावक पटाखा बजाने के स्थान पर बाल्टी में पानी भरकर रखा हुआ था।
चाइनीज पटाखों का बहिष्कार और पटाखा दूकानदारों से अवैध वसूली का नतीजा इस बार यह रहा कि दो गुने-तीन गुने दामों पर पटाखों की बिक्री हुई। पटाखा दूकानदारों को तोल-मोल बिल्कुल पसंद नहीं था। वे साफ कहते नजर आए कि भैया वसूली के आगे पस्त हैं। 50 का डब्बा सौ और सौ का डब्बा 200 रुपये में बिका। दीपावली को लेकर मिठाई दूकानदारों पर सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई। दूकानों पर अनेक प्रकार की मिठाइयां बिकीं। लोग बंद पैकेट मिठाई को ज्यादा पसंद कर रहे थे। वहीं खोए की शुद्धता वाली दूकानों पर मिठाइयों का मूल्य ग्राहकों को दुगुना देना पड़ रहा है। ऐसे में सोनपापड़ी, मगदल, गोंद का लड्डू अधिक बिक रहे हैं। वहीं शाही पेड़ा और देशी घी से बना सोन पापड़ी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। मिठाई विक्रेता उदय कुमार बताते हैं कि लोगों को शुद्धता की गारंटी वाले मिठाई अधिक पसंद है। छोहरा का लड्डू इस बार बाजार में धूम मचाए हुए है।
उधर बेल्थरारोड संवाददाता के अनुसार तमसो मा ज्योतिर्गमय का प्रतीक दीपावली नगर क्षेत्र में परंपरागत हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शाम ढलते ही पूरा नगर रोशनी से जगमगा उठा। विद्युत झालरों की मिट्टी की दीपकों की कतारें अद्भुत छटा बिखेर रही थी। व्यापारियों ने लक्ष्मी-गणेश का पूजन-अर्चन कर सुख समृद्धि की कामना की। चीन निर्मित सामानों का बहिष्कार का असर पर्व पर साफ दिखाई दिया। लोग स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग के प्रति जागरूक दिखे। दीप पर्व पर देररात तक पटाखों के गूंज सुनाई देती रही। पूरे दिन नगर में चहल-पहल बनी रही।