बलिया। जिला अस्पताल के दूसरे परिसर में संचालित एनआरसी (न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर) में रात नौ बजे के बाद स्वास्थ्यकर्मी अंदर से गेट बंद कर आराम फरमाते हैं। जबकि एनआरसी वार्ड को 24 घंटा संचालित करने के लिए तीन शिफ्ट में डयूटी लगती है।
रात 10 बजे के बाद अस्पताल की पड़ताल के दौरान एनआरसी वार्ड का दरवाजा अंदर से बंद था। एक व्यक्ति द्वारा करीब 10 मिनट तक दरवाजा खोलवाने के लिए आवाज लगाई गई। इसके बावजूद किसी ने दरवाजा नहीं खोला। वह एक रिश्तेदार से मिलने के लिए आए थे। एनआरसी में 59 सप्ताह तक के कुपोषित बच्चों को पोषणयुक्त भोजन देते हुए परिजनों को सही पोषण की जानकारी दी जाती है। कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों को गांव-गांव जाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व आशा कार्यकर्ता चिह्नित करती हैं। उन्हें एनआरसी वार्ड में भर्ती कराया जाता है। इस समय पांच बच्चे भर्ती हैं।
विभागीय सूत्रों की माने तो रात की शिफ्ट में डयूटी करने वाले कुछ कर्मचारी डयूटी से गैर हाजिर रहती है। ऊंची पहुंच होने के बिना ऑन लाइन हाजिरी के भी वेतन का भुगतान हर माह होता है। चिकित्सक की देखरेख में बच्चों को इलाज के साथ उन्हें पौष्टिक भोजन देकर स्वस्थ किया जाता है। जिलाधिकारी की निगरानी में संचालित एनआरसी वार्ड 24 घंटे संचालित होता है। इस बाबत सीएमएस डॉ. एसके यादव ने कहा कि एनआरसी वार्ड में बच्चों के साथ महिलाएं भर्ती रहती है और डयूटी करने वाली कर्मचारी भी महिला होेने के कारण सुरक्षा के दृष्टि से अंदर से दरवाजा बंद कर लेती है। उक्त दिन डयूटी पर कौन था, इसकी जानकारी करवाता हूं।