बलिया रोडवेज डिपो से बस पकड़ने आएं तो अपने साथ पीने का पानी व धूप से बचने की व्यवस्था जरूर लेकर आएं। तपती धूप में खुले आसमान के नीचे खड़ी बसें गर्म होने से यात्रियों की परेशानी और बढ़ जा रही है। चालक व परिचालक इधर-उधर खड़े हो जा रहे हैं लेकिन सीट पर बैठे यात्री पसीने से बेहाल हो जा रहे हैं। रोडवेज डिपो के नये भवन निर्माण की प्रक्रिया जारी है।
इसके लिए परिवहन निगम ने जीराबस्ती वर्कशाॅप से बसों के संचालन का निर्णय लिया था लेकिन यात्रियों की पहुंच से दूर होने के कारण डिपो से ही संचालन होता रहा। गर्मी शुरू होने पर निगम की तरफ से सुरक्षित संचालन के लिए भूमि उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन को पत्र लिखा गया था लेकिन भूमि नहीं मिलने के कारण बसों का संचालन सड़क से खुले आसमान के नीचे किया जा रहा है।
इसके चलते यात्रियों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों की तबीयत खराब होने का खतरा बना रहता है। इसके चलते कई बार जाम की स्थिति बन जाती है। बलिया डिपो से निगम व अनुबंधित कुल 91 बसों का संचालन होता है। बलिया-आजमगढ़-लखनऊ के साथ ही देवरिया, वाराणसी, दोहरीघाट, बेल्थरारोड व बैरिया की बसें चलाई जाती हैं। प्रतिदिन 3000 से 4000 यात्री यात्रा करते हैं। इसके बाद भी व्यवस्था नदारद है।
आय में आई 5 प्रतिशत की गिरावट
गर्मी का सीजन शुरू होने के बाद आसमान के नीचे से खड़ी बसों के कारण निगम के राजस्व पर भी असर पड़ा है। निगम के अनुसार इधर 5 प्रतिशत राजस्व का नुकसान हुआ है। सुविधा न होने से यात्री प्राइवेट वाहनों से निकल जा रहे हैं। इसके पीछे मुख्य कारण बसों के इंतजार करने के लिए छांव की व्यवस्था का न होना है।
बोले यात्री
रोडवेज बस डिपो पर किसी तरह की सुविधा नहीं है। कम से कम यात्रियों को बैठने के लिए छांव की व्यवस्था होनी चाहिए। अजीत लाल यादव।
डिपो पर यात्री सुविधाएं पूरी तरह से नदारद है। धूप में खड़े होकर बस का इंतजार करने से तबीयत खराब होने का भय बना हुआ है। - शिवानी।
निगम को कम से कम महिला व बच्चों को ध्यान में रखकर छांव की सुविधा करनी चाहिए। धूप में खड़ी बसें भी आग फेंक रही है। - घनश्याम कुमार।
बसों का इंतजार करना खल जा रहा है। विवशता में यात्रा करनी पड़ रही है। तीखी धूप में प्यास बुझाने के लिए पानी तक नहीं है। अन्य सुविधाओं की बात छोड़ दीजिए। -शनि कुमार
शेड लगाने की कोई जगह नहीं बन पा रही है। इससे यात्रियों के अलावा चालक व परिचालकों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। फिलहाल दो घड़े में पानी की व्यवस्था जल्द की जाएगी। - अजय कुमार, एआरएम