रामगढ़। गंगा का जलस्तर अब तेजी से लाल निशान की ओर बढ़ रहा है। जिस रफ्तार से गंगा के जलस्तर में वृद्धि हो रही है उसे देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि गंगा जल्द ही खतरे के निशान को पार कर सकती है। गंगा के बढ़ाव को देखते हुए एक बार फिर से गंगा के मुहाने पर बसे गांव के लोगों की माथे पर चिंता की लकीरें उभरनी शुरू हो गई है। अगर गंगा लाल निशान को पार करती है तो क्षेत्र में तबाही मचा सकती है।
गंगा के जलस्तर में नाटकीय परिवर्तन का क्रम जारी है। इससे पहले हुए बढ़ाव के कारण गंगा के तलहटी में किसानों की खड़ी परवल की खेती पानी में डूब गई थी। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ था। सुधर छपरा से लेकर बादिलपुर दियरी तक करीब 420 बीघे से अधिक खेतों में खड़ी फसल का नुकसान हुआ था।
किसान किसी तरह धीरे-धीरे अपने जीवन की गाड़ी पटरी पर लाने का सोच ही रहे थे कि एक बार फिर गंगा के बढ़ाव ने उनकी दिन का चैन व रातों की नींद हराम कर दी है। केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर रविवार की शाम चार बजे 55.840 मीटर दर्ज किया गया। प्रति घंटा दो सेंटीमीटर का बढ़ाव बना हुआ है।
ठोकरों पर पड़ने लगा दबाव
रामगढ़। गंगा के जलस्तर में वृद्धि के कारण नदी की बैक रोंलिग धारा का दबाव पचरुखिया से लेकर दुबे छपरा तक बने ठोकर पर पड़ने शुरू हो गए हैं। बंधे के उत्तर दिशा में बसे लोगों में यह भय बना हुआ है। गंगा में उफन आई तो एनएच-31 भी खतरे में पड़ सकता है। इसके साथ ही लाखों की आबादी भी प्रभावित हो सकती है। इस बात का भय बाढ़ खंड को भी है। तभी तो वे पहले से क्षतिग्रस्त टुकड़ों में कुछ चुनिंदा स्थानों की मरम्मत कराने का काम शुरू करा दिया। ठेकेदारों ने जमकर मरम्मत कार्य में मानकों की धज्जियां उड़ाई हैं।