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Ballia News: किसान हो रहे कंगाल तो ठेकेदार मालामाल

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जयप्रकाशनगर। आजादी के बाद से ही द्वाबा के बाशिंदे गंगा व सरयू नदी की बाढ़ की आपदा और कटान से तबाही के मंजर को झेलते चले आ रहे हैं। द्वाबा की भौगोलिक स्थिति कुछ इस प्रकार है कि इसके उत्तरी छोर में सरयू नदी तो दक्षिणी क्षेत्र में गंगा नदी बहती है। दोनों नदियां प्रतिवर्ष अपना तांडव दिखाती है, जिससे किसान बर्बाद होता है जबकि इस तबाही से बचाने के नाम पर वर्षों से बाढ़ विभाग के ठेकेदार मालामाल होते चले आ रहे हैं।
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वर्षों से द्वाबा के किसान बाढ़ और कटान का मंजर झेल रहे हैं। कोई गंगा में अपना कृषि योग्य भूमि गवां चुका है तो कोई सरयू नदी की कटान में अपनी पूरी कृषि योग्य भूमि व आशियाना गंवाकर अब भुखमरी की चौखट पर आ खड़ा हुआ है। जेपी के सिताबदियारा क्षेत्र में फिर एक बड़ी दास्ता लिखने के लिए सरयू व गंगा नदी तैयार है। बीते दस दिनों से दोनों नदियों के जलस्तर में घटाव-बढ़ाव का सिलसिला जारी है। लोगों को फिर इस वर्ष बाढ़ आने की आशंका बनती जा रही है।
मुरली छपरा ब्लॉक के गंगा नदी की चपेट में आने वाले पूर्वों में कोड़रहा नौबरार के तीन पूर्वे व सरयू नदी की चपेट में इब्राहिमाबाद नौबरार ग्राम पंचायत के पांच पूर्वे व चांददीयर के करीब आधा दर्जन पूर्वे की करीब 50 हजार आबादी जलमग्न हो जाती है। इसके अलावा, बांध के भीतर तरसोत के पानी से दर्जनों गांवों के किसानों द्वारा बोई गई करीब एक हजार एकड़ की खड़ी फसल डूबकर बर्बाद हो जाती है जिसका कोई पुछनहार नहीं होता है। सरकार की तरफ से इन बाढ़ पीड़ितों को बचाने के नाम पर दशकों पूर्व से प्रतिवर्ष करोड़ों रूपये खर्च जरूर किए जाते हैं लेकिन इसका लाभ किसानों को नहीं मिलता बल्कि विभागीय अधिकारी व ठेकेदार जरूर मालामाल हो जाते हैं। सरकारी अमला हमेशा यह कहता है कि सूची बनाकर फसलों के नुकसान का मुआवजा दिया जाएगा लेकिन ऐसा कभी नहीं होता।
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किसान लाचार और बेबस होकर कहीं कमाने के लिए पलायन कर जाते हैं या आसपास के अन्यत्र इलाके में सिकमी तौर पर किसी दूसरे से खेत लेकर खेती कर अपनी जीविका चलाते हैं। हर वर्ष यह कटान व बाढ़ का सिलसिला मई-जून से शुरू होकर अगस्त सितंबर तक चलता है और इस पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करती है लेकिन न तो बाढ़ से राहत मिलती है और न ही कटान से निजात। हर बार विभागीय अधिकारी नदी की तेवर को भयावह बता अपना गिरेबान बचाने का काम करते हैं।

हर वर्ष प्रभावित होते हैं यह मोहल्ले
जयप्रकाश नगर। क्षेत्र के गंगा व सरयू नदी के जलस्तर में जब-जब वृद्धि होती है तब-तब क्षेत्र के भगवान टोला, हरिजन बस्ती, पूर्वी भवन टोला गंगा की चपेट में तो बैजनाथ के डेरा, पियारी टोला, टोला फतेह राय के, बकुल्हा पूर्वी, बकुल्हा पश्चिमी, चक्की चांददीयर, पलटू नगर, लोहा टोला, श्रीपालपुर के डेरा, शिवदत्त पांडेय का टोला, रमेश्वर टोला, दलेल टोला, बड़का सुफल टोला आदि मोहल्ले पूरी तरह जलमग्न हो जाते हैं।

बोले ग्रामीण, नहीं मिली राहत
जयप्रकाश नगर। क्षेत्र के अंशु सिंह, ग्राम प्रधान सुमेर यादव, ग्राम प्रधान रामनरेश चौधरी, पूर्व प्रधान वीरेंद्र यादव, राजकिशोर यादव, हरेंद्र यादव, अमर नाथ यादव, सूर्यनाथ यादव, विदेशी यादव, संजय यादव, छोटे लाल यादव, सुरेंद्र यादव, हरिशंकर यादव आदि ने बताया कि सरकार द्वारा वर्षो से बाढ़ व कटान के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद क्षेत्रवासियों को दोनों नदियों के प्रकोप से आज तक मुक्ति नहीं मिल सकी। इस वर्ष भी लग रहा है कि वह दिन देखना ही पड़ेगा। जबकि इस वर्ष भी बाढ़ विभाग द्वारा इस नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

इस वर्ष बीएसटी बांध को सरयू नदी की कटान से बचाने के लिए कटाव रोधी कार्य करवाकर सुरक्षित कर दिया गया है। इसके अलावा बाढ़ से निजात दिलवाने के लिए रिंग बांध का निर्माण कार्य काफी तेजी से किया गया लेकिन अभी अपूर्ण है जो बहुत जल्द पूरा कराया जाएगा। इसके बाद सिताबदियारा के लोग बाढ़ से भी स्थाई रूप से सुरक्षित हो जाएंगे। - संजय कुमार मिश्रा, अधिशासी अभियंता, बाढ़ खंड, बलिया
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