मझौवां। गंगा नदी के जलस्तर में लगातार चार दिनों से बढ़ोतरी हो रही है। तीन मीटर जलस्तर में वृद्धि होने से किनारे बसे कई गांवों में कटान होने लगी है। 12 एकड़ जमीन गंगा में समा चुकी है।
राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के किनारों पर कटानरोधी कार्य भी आधे-अधूरे छोड़ दिए गए हैं। किमी 26.250 पर निर्माणाधीन स्पर के ऊपर लगभग चार से पांच फीट पानी बढ़ जाने के बाद जेसीबी मशीन से स्लोपिंग का कार्य करके छोड़ दिया गया है। किमी 27.500 से 27.950 के बीच चार कटर के निर्माण कार्य में भारी लापरवाही बरती गई है। आलम यह कि कटर के गैपिंग में पार्कोंपाइन विधि का कार्य झाड़-झंझाड डालकर खानापूर्ति कर कार्यस्थल से ठेकेदार फरार हो गए हैं।
बाढ़ विभाग से कटर पूर्ण रूप से तैयार होने से पहले ही धराशायी होना शुरू हो गया है। जिससे सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा, नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की, उपाध्याय टोला सहित दर्जनों गांववासियों के लिए बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। शनिवार की दोपहर किसानों के 12 एकड़ उपजाऊ भूमि कटान की भेंट चढ़ गए। कटान तेजी से आगे बढ़ रहा है और बस्तियां निशाने पर है। ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने ठेकेदारों से संपर्क करने की कोशिश की, तो वे या तो अनुपस्थित पाए गए या फिर फोन पर भी उनका कोई जवाब नहीं आया।
इस स्थिति ने ग्रामीणों में दहशत पैदा कर दी है। क्योंकि गंगा का कटान उनके आशियाना व जीविका उपजाऊ भूमि को सीधे तौर पर खतरे में डाल रहा है। जलस्तर के बढ़ने से नदी के किनारों पर स्थित घरों, खेतों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान हो सकता है। काटन पीड़ित बूचन पाण्डेय का कहना है कि जलस्तर में और वृद्धि होने पर, उनके लिए अपनी ज़िन्दगी और संपत्ति को बचाना कठिन हो जाएगा। विशाल पाण्डेय ने कहा कि हमारे पास कोई रास्ता नहीं बचा है। अगर सरकार हमारी मदद नहीं करती है, तो हमारी जिन्दगी भी खतरे में आ जाएगी। केन्द्रीय जल आयोग गायघाट गेज के मुताबिक शनिवार की शाम 4 बजे गंगा नदी का जलस्तर 53.110 मीटर दर्ज किया गया। इसके साथ ही एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी हो रही है।
वर्जन-
किसानों के उपजाऊ भूमि को बम्बूक्रेट विधि से बचाने के प्रयास किए जाएंगे। राष्ट्रीय राजमार्ग-31 पर जेई को 24 घंटे निगरानी रखने के लिए अलर्ट किया गया है जो पार्कोंपाइप विधि का कार्य लंबित है वो पूरा कर दिया जाएगा।
- संजय कुमार मिश्र, एक्सईएन, बाढ़ विभाग।